झारखंड शराब घोटाला 5 करोड़ की हेरा फेरी और घिर गए IAS विनय चौबे, जानिये आखिर ACB को क्या मिला?

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News India Live, Digital Desk : झारखंड में राजनीति हो या प्रशासन, आए दिन कुछ न कुछ 'तूफानी' होता ही रहता है। लेकिन इस बार खबर थोड़ी ज्यादा गंभीर है क्योंकि मामला राज्य के एक बहुत बड़े अधिकारी यानी आईएएस (IAS) विनय चौबे से जुड़ा है। हम सब जानते हैं कि पिछले कुछ समय से 'झारखंड शराब घोटाला' (Jharkhand Liquor Scam) की चर्चा जोरों पर है, और अब जांच की आंच सीधे बड़े साहबों तक पहुँच गई है।

ताज़ा खबर यह है कि एसीबी (Anti-Corruption Bureau) यानी भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने अपनी जांच तेज कर दी है और इसमें विनय चौबे के खिलाफ कुछ अहम सबूत मिलने की बात सामने आ रही है।

आइये, बिल्कुल आसान और दोस्तों वाली भाषा में समझते हैं कि यह पूरा मामला क्या है और इसमें '5 करोड़ रुपये' का एंगल कहाँ से आ गया।

आखिर माजरा क्या है?
यह पूरी कहानी शुरू हुई थी झारखंड की नई 'एक्साइज पॉलिसी' (शराब नीति) से। आरोप है कि इस नीति को बनाते समय नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं ताकि कुछ खास लोगों या सिंडिकेट को फायदा पहुँचाया जा सके। उस वक्त विनय चौबे मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव भी थे और उनके पास उत्पाद विभाग (Excise Department) की भी जिम्मेदारी थी।

अब एसीबी का कहना है कि यह सब मुफ्त में नहीं हुआ, बल्कि इसके पीछे पैसों का एक बड़ा खेल था।

5 करोड़ वाला राज़ क्या है?
खबरों के मुताबिक़, एसीबी की जांच में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। दावा किया जा रहा है कि इस घोटाले के तार एक 5 करोड़ रुपये की लेनदेन या गड़बड़ी से जुड़े हैं। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या पॉलिसी बनाने के एवज में कोई भारी-भरकम रकम इधर से उधर हुई?

छत्तीसगढ़ के शराब सिंडिकेट के साथ मिलकर नियमों को बदलने और टेंडर में हेराफेरी करने के आरोप लग रहे हैं। कहा जा रहा है कि राजस्व (Revenue) का जो फायदा सरकार को होना चाहिए था, वो जेबों में चला गया।

IAS विनय चौबे क्यों फंसे?
विनय चौबे कोई छोटे अधिकारी नहीं हैं, वो राज्य के सबसे पावरफुल अफसरों में गिने जाते थे। चूंकि शराब नीति उन्हीं की देखरेख में बनी थी, इसलिए एसीबी की सुई अब उन पर अटकी है।

  • एसीबी ने उनके खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की है।
  • उनके ठिकानों पर छापे भी पड़े थे।
  • अब जांच में मिल रहे सबूत उनकी मुश्किलें बढ़ा रहे हैं।

ब्यूरोक्रेसी में सन्नाटा
जैसे ही यह 5 करोड़ वाला मामला उछला है, झारखंड के प्रशासनिक गलियारों (Billionaires and Bureaucracy) में खलबली मच गई है। बाकी अधिकारी भी सहमे हुए हैं कि न जाने कब किसका नंबर आ जाए। यह दिखाता है कि चाहे आप कितने भी ऊंचे पद पर क्यों न हों, कानून का हाथ गिरेबान तक पहुँच ही जाता है।

आगे क्या होगा?
एसीबी अब उन सभी फाइलों और व्हाट्सएप चैट्स को खंगाल रही है जो इस सिंडिकेट का पर्दाफाश कर सकती हैं। आने वाले दिनों में कुछ और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

तो दोस्तों, यह है 'पवर' और 'पैसे' के खेल की असली कहानी। क्या आपको लगता है कि इस जांच के बाद असली गुनहगार जेल जाएंगे?