रिम्स के बाहर चला प्रशासन का बुलडोजर देखते ही देखते मलबे में तब्दील हो गईं 30 दुकानें, मच गया हड़कंप
News India Live, Digital Desk : झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स (RIMS) में अगर आप कभी इलाज कराने गए होंगे, तो आपने एक चीज जरूर नोटिस की होगी। वो है अस्पताल के गेट और बाउंड्री वॉल के पास बेतहाशा भीड़ और सजी हुई दुकानें। कई बार तो हालात ऐसे हो जाते थे कि मरीज को ले जाने वाली एंबुलेंस को भी रास्ता नहीं मिल पाता था।
लेकिन अब रांची प्रशासन और रिम्स प्रबंधन ने ठान लिया है कि अस्पताल परिसर को अतिक्रमण मुक्त (Encroachment Free) बनाना है। इसी के तहत मंगलवार को वहां एक बड़ी कार्रवाई देखने को मिली, जिसे देखकर हड़कंप मच गया।
आइये, आसान शब्दों में जानते हैं कि रिम्स में आखिर हुआ क्या और इसके पीछे की वजह क्या थी।
सुबह-सुबह पहुंच गया बुलडोजर
आमतौर पर बाज़ार में रौनक रहती है, लेकिन कल रिम्स के आस-पास का नज़ारा कुछ और ही था। भारी पुलिस बल (Police Force) और मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में वहां बुलडोजर पहुंचा। देखते ही देखते 30 से ज्यादा अवैध दुकानों और गुमटियों को तोड़ गिराया गया।
ये दुकानें रिम्स के पेइंग वार्ड (Paying Ward) और नए बने भवनों के पास सटकर बनाई गई थीं। यहाँ कोई चाय बेच रहा था, तो कोई नाश्ता। बरसों से ये लोग सरकारी जमीन पर कब्जा जमाए बैठे थे।
दुकानदारों में मची अफरा-तफरी
जैसे ही कार्रवाई शुरू हुई, दुकानदारों में भगदड़ मच गई। कुछ लोग अपनी दुकानों का सामान बचाने के लिए भागने लगे, तो कुछ ने विरोध करने की दबी जुबान में कोशिश भी की। उनका कहना था कि यही उनकी रोजी-रोटी है। लेकिन प्रशासन के सख्त रवैये के आगे किसी की नहीं चली।
क्यों जरूरी थी यह कार्रवाई?
दोस्तो, किसी की दुकान टूटती है तो बुरा लगता है, लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू भी देखना जरूरी है।
- ट्रैफिक जाम: इन दुकानों की वजह से सड़क संकरी हो गई थी। गाड़ियाँ खड़ी करने की जगह नहीं बचती थी और अक्सर एंबुलेंस जाम में फंसी रहती थीं। एक मरीज की जान, एक कप चाय की दुकान से ज्यादा कीमती है।
- गंदगी और सुरक्षा: रिम्स प्रशासन का कहना था कि इन अवैध कब्जों की वजह से अस्पताल के पास गंदगी रहती थी और कई बार असामाजिक तत्वों का जमावड़ा भी लगा रहता था।
प्रशासन की चेतावनी
इस अभियान के बाद प्रशासन ने साफ़ कर दिया है कि अगर दोबारा किसी ने यहाँ कब्जा करने की कोशिश की, तो इस बार और भी सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। यानी संदेश साफ़ है"अस्पताल को बाज़ार मत बनाओ।"
आपकी राय?
रिम्स सुधार की दिशा में यह एक कड़ा कदम है। सड़कें खाली होने से मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। लेकिन जो गरीब दुकानदार वहां से हटाए गए, उनके लिए भी कोई वैकिल्पिक व्यवस्था होनी चाहिए या नहीं?