Jharkhand Gardener : 51 रुपये की दिहाड़ी पर रखा गया माली जीता न्याय की जंग, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला; अब करना होगा पक्का

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News India Live, Digital Desk: न्याय मिलने में देरी भले हो सकती है, लेकिन न्याय की जीत सुनिश्चित है। झारखंड के एक साधारण माली ने इस बात को सच कर दिखाया है। मात्र 51 रुपये प्रतिदिन की दिहाड़ी पर काम शुरू करने वाले एक शख्स ने अपनी नौकरी को पक्का (Regularization) कराने के लिए सालों तक कानूनी लड़ाई लड़ी। अब देश की सबसे बड़ी अदालत, सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कर्मचारी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए सरकार को उसे नियमित करने का आदेश दिया है।

20 साल का लंबा संघर्ष और ₹51 का मेहनताना

यह कहानी झारखंड के एक सरकारी विभाग में दैनिक वेतनभोगी के रूप में काम करने वाले माली की है। उसे महज 51 रुपये की मामूली दिहाड़ी पर रखा गया था। दशकों तक ईमानदारी से सेवा करने के बाद भी जब उसे नियमित नहीं किया गया, तो उसने अदालत का दरवाजा खटखटाया। हाई कोर्ट से होते हुए यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। इस लंबी कानूनी प्रक्रिया में कर्मचारी ने कई आर्थिक और मानसिक चुनौतियों का सामना किया, लेकिन हार नहीं मानी।

सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी: 'शोषण बर्दाश्त नहीं'

मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन के ढुलमुल रवैये पर नाराजगी जताई। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई कर्मचारी दशकों से निरंतर सेवा दे रहा है, तो उसे केवल तकनीकी आधार पर नियमितीकरण के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इसे 'मजदूरों का शोषण' करार दिया और आदेश दिया कि कर्मचारी को उसकी सेवा अवधि के आधार पर तत्काल पक्का किया जाए और उसे सभी बकाया लाभ (Arrears) दिए जाएं।

झारखंड सरकार को लगा बड़ा झटका

झारखंड सरकार और संबंधित विभाग इस मामले में लगातार दलीलें दे रहे थे कि नियुक्ति प्रक्रिया में खामियां थीं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज कर दिया। यह फैसला झारखंड के हजारों अन्य दैनिक वेतनभोगियों के लिए एक मिसाल बन गया है, जो सालों से अपनी नौकरी पक्की होने का इंतजार कर रहे हैं।

मजदूर वर्ग के लिए बड़ी जीत

इस ऐतिहासिक फैसले के बाद कर्मचारी और उसके परिवार की आंखों में खुशी के आंसू हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश न केवल एक व्यक्ति की जीत है, बल्कि उन सभी कामगारों के लिए उम्मीद की किरण है जो न्यूनतम मजदूरी पर सरकारी सिस्टम को संभाल रहे हैं।