Jharkhand Multi-Crore Scam : 308 करोड़ का महाघोटाला मैक्सिजोन के निदेशकों ने 16,927 निवेशकों को लगाया चूना, ED की चार्जशीट में सनसनीखेज खुलासे
News India Live, Digital Desk : झारखंड में निवेश के नाम पर हजारों लोगों की गाढ़ी कमाई हड़पने वाली कंपनी मैक्सिजोन (Maxizone) के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपना शिकंजा पूरी तरह कस दिया है। ED द्वारा दाखिल की गई हालिया चार्जशीट में यह खुलासा हुआ है कि कंपनी के निदेशकों ने सुनियोजित तरीके से 16,927 निवेशकों से करीब 308 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की है। यह घोटाला न केवल झारखंड बल्कि आसपास के राज्यों के मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए एक बड़ा झटका है।
कैसे बुना गया ठगी का जाल?
ED की जांच के अनुसार, मैक्सिजोन टच प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़ी अन्य कंपनियों ने निवेशकों को बेहद कम समय में पैसा दोगुना करने और भारी रिटर्न का लालच दिया था। कंपनी ने पिरामिड स्कीम और पोंजी स्कीम का सहारा लेकर लोगों को जोड़ा। शुरुआती दौर में कुछ निवेशकों को छोटा रिटर्न देकर विश्वास जीता गया, जिसके बाद हजारों लोगों ने अपनी जीवन भर की जमापूंजी इस कंपनी में झोंक दी।
निदेशकों की अय्याशी और फंड की हेराफेरी
चार्जशीट में बताया गया है कि निवेशकों से जुटाए गए 308 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कंपनी के निदेशकों ने अपने निजी ऐश-ओ-आराम, महंगी संपत्तियां खरीदने और फंड को दूसरी शेल कंपनियों में ट्रांसफर करने के लिए किया। ED ने जांच के दौरान कई बेनामी संपत्तियों और बैंक खातों के दस्तावेजों को जब्त किया है, जो सीधे तौर पर घोटाले के पैसों से जुड़े पाए गए हैं।
ED की कार्रवाई और निवेशकों की उम्मीद
प्रवर्तन निदेशालय ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत कार्रवाई करते हुए आरोपियों की करोड़ों की संपत्ति पहले ही कुर्क कर ली है। इस चार्जशीट के बाद अब आरोपियों की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। दूसरी ओर, ठगी का शिकार हुए हजारों निवेशक अब इस उम्मीद में हैं कि सरकार और कोर्ट के हस्तक्षेप से उनका डूबा हुआ पैसा वापस मिल सकेगा।
झारखंड पुलिस से ED तक पहुंचा मामला
शुरुआत में इस मामले की जांच स्थानीय पुलिस कर रही थी, लेकिन घोटाले की विशालता और मनी लॉन्ड्रिंग के पुख्ता सबूतों को देखते हुए ED ने इस केस को अपने हाथ में लिया। जांच में यह भी सामने आया है कि कंपनी ने कई शहरों में भव्य सेमिनार आयोजित कर लोगों को गुमराह किया था।