झारखंड की जेलों में जाति के आधार पर रखे जा रहे कैदी? औचक निरीक्षण के बाद आई रिपोर्ट ने उड़ाए होश
News India Live, Digital Desk: क्या आधुनिक भारत की जेलों में आज भी जातिगत भेदभाव बरकरार है? झारखंड की जेलों से जुड़ी एक हालिया रिपोर्ट ने इस गंभीर सवाल को हवा दे दी है। जेलों के औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) के दौरान यह जानकारी सामने आई है कि कुछ जेलों में कैदियों के रखरखाव और उनके कार्यों के आवंटन में जातिगत आधार (Caste Basis) का प्रभाव देखा गया है। इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होते ही मानवाधिकार संगठनों और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
निरीक्षण में क्या हुआ खुलासा?
हाल ही में हुए उच्चस्तरीय निरीक्षण के बाद तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड की कुछ प्रमुख जेलों में कैदियों को मिलने वाले काम, जैसे रसोई में खाना बनाना या साफ-सफाई, उनकी जाति के आधार पर तय किए जा रहे थे। यह न केवल जेल नियमावली (Jail Manual) का उल्लंघन है, बल्कि भारतीय संविधान द्वारा दिए गए समानता के अधिकार पर भी चोट करता है।
जेल मैनुअल बनाम हकीकत
आदर्श जेल मैनुअल के अनुसार, किसी भी कैदी के साथ उसकी जाति, धर्म या समुदाय के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। उन्हें केवल उनके अपराध की प्रकृति और उनके व्यवहार के आधार पर अलग-अलग बैरकों में रखा जा सकता है। हालांकि, निरीक्षण में पाया गया कि कई जगहों पर पुरानी और रूढ़िवादी परंपराएं अब भी प्रभावी हैं, जिन्हें प्रशासनिक अनदेखी का नतीजा माना जा रहा है।
प्रशासन की सफाई और सख्त निर्देश
मामला तूल पकड़ते ही जेल प्रशासन ने इस पर स्पष्टीकरण जारी किया है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी प्रकार का जातिगत भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी जेल अधीक्षकों को कड़े निर्देश जारी किए गए हैं कि वे यह सुनिश्चित करें कि कैदियों का वर्गीकरण केवल सुरक्षा और कानूनी मानकों के आधार पर हो।
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख
बता दें कि हाल के वर्षों में सुप्रीम कोर्ट ने भी देश भर की जेलों में व्याप्त जातिगत भेदभाव पर सख्त नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि जेलों के भीतर सफाई और खाना बनाने जैसे कार्यों को जाति से जोड़ना असंवैधानिक है। झारखंड की इस रिपोर्ट के बाद अब राज्य सरकार पर दबाव है कि वह जेल सुधारों (Prison Reforms) की दिशा में ठोस कदम उठाए।