Jharkhand Civic Polls : झारखंड निकाय चुनाव में EVM की विदाई अब बैलेट पेपर से होगा मतदान; जानें क्यों लिया गया यह फैसला
News India Live, Digital Desk: झारखंड में नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों के चुनाव की सुगगाहट तेज हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने साफ कर दिया है कि इस बार चुनाव ईवीएम के बजाय मतपत्रों (Ballot Papers) के जरिए कराए जाएंगे। इस फैसले ने न केवल राजनीतिक दलों बल्कि आम जनता को भी हैरान कर दिया है। आयोग ने मतदान से लेकर गिनती तक का पूरा खाका तैयार कर लिया है।
क्यों हुई EVM की छुट्टी? (Reason for Change)
सूत्रों और आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, बैलेट पेपर पर वापस लौटने के पीछे कुछ मुख्य कारण हैं:
मशीनों की कमी: राज्य में उपलब्ध ईवीएम की संख्या निकायों के सभी वार्डों और पदों (मेयर, डिप्टी मेयर, पार्षद) के लिए पर्याप्त नहीं थी।
तकनीकी जटिलता: एक साथ कई पदों के लिए मतदान होने के कारण मल्टी-पोस्ट ईवीएम की व्यवस्था करना चुनौतीपूर्ण था।
पारदर्शिता का तर्क: आयोग का मानना है कि मतपत्रों से चुनाव कराने पर छोटे स्तर के चुनावों में पारदर्शिता को लेकर उठने वाले सवालों को कम किया जा सकेगा।
काउंटिंग का नया नियम: 72 घंटे का 'वेटिंग पीरियड'
इस बार की चुनाव प्रक्रिया में सबसे बड़ा बदलाव मतगणना (Counting) के समय को लेकर है:
72 घंटे बाद गिनती: मतदान खत्म होने के ठीक बाद गिनती शुरू नहीं होगी। बैलेट बॉक्स को सुरक्षित स्ट्रांग रूम में रखा जाएगा और मतदान के 72 घंटे (3 दिन) बाद वोटों की गिनती शुरू होगी।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम: इस अंतराल के दौरान स्ट्रांग रूम की सुरक्षा के लिए त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरा और सीसीटीवी (CCTV) की निगरानी अनिवार्य की गई है।
चुनाव की अन्य महत्वपूर्ण तैयारियां
वार्डों का परिसीमन: चुनाव से पहले कई नगर निकायों में वार्डों के नए सिरे से परिसीमन और आरक्षण (Reservation) की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
मतदाता सूची: आयोग ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण का काम तेज कर दिया है, ताकि नए युवाओं के नाम जोड़े जा सकें।
पदों का विवरण: झारखंड के 48 नगर निकायों में चुनाव होने हैं, जिसमें मेयर और अध्यक्ष के पदों पर सीधी जंग देखने को मिलेगी।
बैलट पेपर से मतदान: क्या होंगे चुनौतियां?
विशेषज्ञों का मानना है कि बैलेट पेपर पर लौटने से चुनाव प्रक्रिया थोड़ी लंबी और थकाऊ हो सकती है:
देर से नतीजे: ईवीएम में जहां परिणाम कुछ ही घंटों में आ जाते हैं, वहीं बैलेट पेपर की गिनती में 24 से 48 घंटे का समय लग सकता है।
इनवैलिड वोट: मुहर सही जगह न लगने के कारण बड़ी संख्या में वोट 'अमान्य' होने का खतरा रहता है।