Jharkhand University Reform : राजभवन का बड़ा आदेश विश्वविद्यालयों के करोड़ों रुपये अब प्राइवेट बैंकों में नहीं, सरकारी बैंकों में होंगे शिफ्ट

Post

News India Live, Digital Desk : झारखंड के सरकारी विश्वविद्यालयों में अब वित्तीय अनुशासन (Financial Discipline) का नया दौर शुरू होने वाला है। राजभवन ने कड़ा रुख अपनाते हुए सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया है कि वे निजी बैंकों (Private Banks) में जमा अपने करोड़ों रुपये के फंड को तुरंत निकालकर सरकारी बैंकों (Canara और Central Bank जैसे संस्थानों) में ट्रांसफर करें। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक धन की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

1. निजी बैंकों से 'तौबा' क्यों? (Reason for the Shift)

अक्सर देखा गया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन अपने फंड को अधिक ब्याज या अन्य सुविधाओं के लालच में निजी बैंकों में जमा कर देते थे। राजभवन की जांच में कुछ गंभीर चिंताएं सामने आई थीं:

पारदर्शिता का अभाव: निजी बैंकों में जमा राशि के लेनदेन और उस पर मिलने वाले लाभ का हिसाब-किताब रखने में पारदर्शिता की कमी पाई गई।

वित्तीय जोखिम: सरकारी संस्थानों के फंड की सुरक्षा के लिए पीएसयू (Public Sector Undertaking) बैंकों को अधिक विश्वसनीय माना जाता है।

केंद्रीयकृत प्रबंधन: अब Canara Bank और Central Bank of India जैसे बैंकों में फंड रहने से सरकार और राजभवन के लिए मॉनिटरिंग करना आसान होगा।

2. राजभवन की नई गाइडलाइंस (Key Directives)

राज्यपाल के प्रधान सचिव द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार:

डेडलाइन: सभी कुलपतियों (VCs) को एक निश्चित समय सीमा के भीतर निजी बैंकों के खाते बंद कर फंड ट्रांसफर करने को कहा गया है।

व्यय पर रोक: बिना पूर्व अनुमति के बड़े वित्तीय लेन-देन या फंड के विविधीकरण (Diversification) पर रोक लगा दी गई है।

पेंशन और सैलरी: कर्मचारियों की सैलरी और रिटायरमेंट फंड के प्रबंधन के लिए भी सरकारी बैंकों के साथ समन्वय बिठाने का निर्देश है।

3. विश्वविद्यालयों की आर्थिक स्थिति पर असर

झारखंड के कई विश्वविद्यालय (जैसे रांची विश्वविद्यालय, सिद्धू कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय आदि) वर्तमान में वित्तीय संकट और पेंशन भुगतान की समस्याओं से जूझ रहे हैं।

ऑडिट की तैयारी: राजभवन ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही सभी विश्वविद्यालयों का स्पेशल ऑडिट कराया जाएगा ताकि यह पता चल सके कि पिछले वर्षों में फंड का उपयोग कहां और कैसे हुआ।

जवाबदेही: अब कुलसचिव (Registrar) और वित्त अधिकारी (Finance Officer) को हर तिमाही में फंड की स्थिति की रिपोर्ट राजभवन को सौंपनी होगी।

4. कुलपति और अधिकारियों में हलचल

इस आदेश के बाद विश्वविद्यालय के गलियारों में खलबली मच गई है। कई अधिकारियों का मानना है कि इससे स्वायत्तता (Autonomy) प्रभावित हो सकती है, वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए यह 'सर्जिकल स्ट्राइक' जरूरी थी।