Jharkhand ATS : जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई का पाकिस्तानी कनेक्शन, झारखंड एटीएस की जांच में सामने आई यह खतरनाक कहानी
News India Live, Digital Desk: झारखंड एटीएस (आतंकवाद निरोधक दस्ता) की गिरफ्त में आए गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के करीबी गुर्गे मयंक सिंह ने पूछताछ में ऐसे सनसनीखेज खुलासे किए हैं, जिसने देश की सुरक्षा एजेंसियों के भी कान खड़े कर दिए हैं। मयंक ने कबूल किया है कि उसका गैंग सिर्फ देश के अंदर से ही नहीं, बल्कि सीमा पार पाकिस्तान से भी ऑपरेट कर रहा था।
उसने बताया है कि पाकिस्तान में बैठा एक बड़ा हथियार सप्लायर, जिसका नाम जसकरण सिंह है, ड्रोन के जरिए पंजाब बॉर्डर पर AK-47, जिगाना पिस्टल और कारतूसों की बड़ी खेप भेजता था, जिसे लॉरेंस बिश्नोई गैंग के लोग उठाते थे।
कौन है यह पाकिस्तानी सप्लायर और कैसे होता था यह 'ड्रोन वाला' खेल?
मयंक सिंह ने एटीएस को बताया कि पाकिस्तान से हथियारों की सप्लाई का पूरा काम जसकरण सिंह देखता था। यह खेल बेहद शातिराना तरीके से खेला जाता था:
- लोकेशन की जानकारी: इसके बाद वह गिराए गए हथियारों की लोकेशन और तस्वीरें अमृतसर जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई के एक और करीबी गुर्गे को भेजता था।
- उठाते थे गुर्गे: फिर लॉरेंस बिश्नोई के निर्देश पर गैंग के गुर्गे उस लोकेशन पर जाकर हथियारों की खेप उठा लेते थे।
यह खुलासा इस बात का सबूत है कि लॉरेंस बिश्नोई का गैंग कितना संगठित और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके देश-विरोधी ताकतों के साथ मिलकर काम कर रहा है।
क्यों हो रही थी यह खतरनाक सप्लाई? झारखंड में थी बड़ी साजिश
एटीएस की जांच में यह भी सामने आया है कि इन पाकिस्तानी हथियारों की खेप का इस्तेमाल झारखंड में एक बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए किया जाना था। लॉरेंस बिश्नोई के इशारे पर गैंग का निशाना एक बड़ी कोयला कंपनी के सीनियर अधिकारी थे। मयंक सिंह और उसके साथी इसी वारदात को अंजाम देने के लिए हथियार जमा कर रहे थे ताकि वे उस अधिकारी पर हमला कर सकें।
न फोन कॉल, न व्हाट्सएप, ऐसे होती थी 'सीक्रेट' बात
मयंक ने यह भी बताया कि गैंग में आपस में बातचीत के लिए सामान्य फोन कॉल या व्हाट्सएप का इस्तेमाल नहीं होता था। खुद लॉरेंस बिश्नोई ने उसे एक ऐपल आईफोन (Apple iPhone) दिया था।
- इसी सिग्नल के जरिए गैंग के लोगों को एक-दूसरे से बात करने का समय और तरीका बताया जाता था, ताकि पुलिस उनकी बातचीत को ट्रेस न कर सके।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर जेलों से ऑपरेट हो रहे बड़े आपराधिक सिंडिकेट और उनके अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन को बेनकाब कर दिया है। झारखंड एटीएस अब इस मामले की जड़ें खंगालने में जुटी हुई है।