Jaya Ekadashi 2026: आज विष्णु पूजन का महासंयोग, पिशाच योनि से मुक्ति दिलाती है यह कथा, जानें महत्व और नियम

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News India Live, Digital Desk: आज 29 जनवरी 2026, गुरुवार को माघ मास के शुक्ल पक्ष की जया एकादशी मनाई जा रही है। शास्त्रों में जया एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी और पापविनाशक माना गया है। विशेष रूप से इस साल यह व्रत गुरुवार के दिन पड़ा है, जो भगवान विष्णु का ही प्रिय दिन है। ऐसे में आज व्रत रखने और कथा सुनने से भक्तों को दोगुना फल प्राप्त होगा।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जया एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को नीच योनि यानी प्रेत या पिशाच योनि में जन्म नहीं लेना पड़ता और ब्रह्म हत्या जैसे घोर पापों से भी मुक्ति मिल जाती है।

जया एकादशी व्रत कथा: जब इंद्र के शाप से पिशाच बने माल्यवान और पुष्पवती

भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को इस व्रत का महत्व बताते हुए यह कथा सुनाई थी:

स्वर्गलोक में देवराज इंद्र के राज्य में एक बार नंदन वन में उत्सव चल रहा था। वहां गंधर्व राज पुष्पबंती की पुत्री पुष्पवती और गंधर्व माल्यवान नृत्य और गायन कर रहे थे। नृत्य के दौरान दोनों एक-दूसरे के मोहपाश में बंध गए और अपनी सुध-बुध खो बैठे। काम मोहित होने के कारण उनके गायन की लय और ताल बिगड़ गई, जिससे इंद्र ने इसे अपना अपमान समझा।

इंद्र का शाप और पिशाच योनि:

क्रोधित होकर इंद्र ने उन्हें शाप दिया कि वे स्वर्ग से च्युत होकर मृत्युलोक में पिशाच योनि को प्राप्त हों। शाप के प्रभाव से दोनों हिमालय के दुर्गम जंगलों में पिशाच बनकर रहने लगे। वहां उन्हें न नींद आती थी और न ही शांति मिलती थी। वे भूख-प्यास और ठंड से व्याकुल रहते थे।

अनायास ही हो गया एकादशी व्रत:

दैवयोग से माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि आई। उस दिन अत्यधिक कष्ट और दु:ख के कारण माल्यवान और पुष्पवती ने कुछ भी आहार ग्रहण नहीं किया। केवल फल और जल का त्याग कर वे पूरे दिन पीपल के वृक्ष के नीचे बैठे भगवान को याद करते रहे। रात में भी ठंड के कारण उन्हें नींद नहीं आई और वे जागरण करते रहे।

मुक्ति और स्वर्ग वापसी:

अनजाने में ही उनसे 'जया एकादशी' का कठिन व्रत और रात्रि जागरण संपन्न हो गया। इस व्रत के प्रभाव से अगले दिन द्वादशी को भगवान विष्णु की कृपा से उनकी पिशाच योनि छूट गई और वे पुन: अपने सुंदर गंधर्व स्वरूप में आ गए। जब वे वापस स्वर्ग पहुंचे, तो इंद्र भी चकित रह गए। माल्यवान ने बताया कि यह सब भगवान वासुदेव की कृपा और जया एकादशी के प्रताप से हुआ है। इंद्र प्रसन्न हुए और उन्होंने कहा कि जो भगवान विष्णु के भक्त हैं, वे मेरे भी पूजनीय हैं।

आज के दिन इन नियमों का रखें विशेष ध्यान

जया एकादशी के दिन कुछ नियमों का पालन अनिवार्य माना गया है:

चावल का त्याग: एकादशी के दिन चावल खाना पूरी तरह वर्जित है। मान्यता है कि इस दिन चावल खाने वाला व्यक्ति अगले जन्म में रेंगने वाले जीव की योनि प्राप्त करता है।

बाल और नाखून न काटें: आज के दिन बाल धोना, नाखून काटना या दाढ़ी बनाना वर्जित माना गया है।

सात्विकता: आज के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें और किसी की निंदा या बुराई न करें।

भगवान विष्णु की पूजा: चूंकि आज गुरुवार भी है, इसलिए भगवान विष्णु को पीले फूल, पीला चंदन और केले का भोग जरूर लगाएं।

जया एकादशी का फल

भगवान श्रीकृष्ण के अनुसार, जो व्यक्ति इस कथा को पढ़ता या सुनता है, उसे अग्निष्टोम यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है। यह व्रत मनुष्य को समस्त मानसिक और शारीरिक कष्टों से मुक्त कर अंत में मोक्ष प्रदान करता है।