Jaya Ekadashi 2026 : क्या आपके काम में भी आ रही हैं अदृश्य बाधाएं? जया एकादशी पर ये उपाय खोल देंगे बंद किस्मत के ताले
News India Live, Digital Desk : हिंदू धर्म में वैसे तो हर एकादशी का अपना महत्व है, लेकिन माघ मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली 'जया एकादशी' की महिमा कुछ अलग ही है। अक्सर हम अपनी लाइफ में बहुत मेहनत करते हैं लेकिन ऐसा लगता है जैसे कोई 'बुरी नजर' या 'नकारात्मक शक्ति' हमें पीछे खींच रही है। पौराणिक कथाओं की मानें तो यह एकादशी इन्हीं सब बाधाओं को दूर करने के लिए जानी जाती है।
साल 2026 में कब है जया एकादशी?
पंचांग और तारीखों के हिसाब से साल 2026 की पहली तिमाही में यह एकादशी जनवरी के आखिरी दिनों या फरवरी की शुरुआत के पास पड़ेगी। भक्त इस दिन भगवान विष्णु की 'माधव' स्वरूप में पूजा करते हैं। यदि आप भी इस व्रत की तैयारी कर रहे हैं, तो अभी से तिथि और शुभ मुहूर्त की जानकारी डायरी में नोट कर लेना ही बेहतर है, ताकि आखिरी समय पर कोई हड़बड़ी न हो।
आखिर इस एकादशी का नाम 'जया' क्यों पड़ा?
जैसा कि नाम से ही पता चलता है, 'जया' यानी जीत। ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने वाले को मोक्ष मिलता है और वह 'पिशाच' योनि (Pret Yoni) से मुक्त हो जाता है। बहुत कम लोग जानते हैं कि इसका धार्मिक संबंध केवल अगले जन्म से ही नहीं, बल्कि इसी जन्म की खुशहाली से भी है। इस दिन सच्चे मन से मांगी गई मुराद आपको हर क्षेत्र में 'विजय' दिलाती है।
पूजा की सरल विधि जो आपको दिलाएगी आशीर्वाद
इस एकादशी पर कोई तामझाम करने की जरूरत नहीं है, भगवान विष्णु केवल सच्ची भक्ति के भूखे हैं।
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पीले कपड़े पहनें।
- भगवान विष्णु की मूर्ति को गंगाजल से नहलाएं और उन्हें पीले फूल, चंदन और 'तुलसी दल' अर्पित करें। याद रहे, विष्णु जी की पूजा बिना तुलसी के पूरी नहीं होती।
- पूरे दिन फलाहार व्रत रखें और अगर संभव हो तो रात्रि जागरण करें।
- अगले दिन यानी द्वादशी को 'पारण' (व्रत खोलना) समय पर ही करें।
सावधानी भी है जरूरी
एकादशी के व्रत में सबसे जरूरी बात ये है कि इस दिन चावल का सेवन नहीं किया जाता। चाहे आप व्रत रख रहे हों या नहीं, एकादशी के दिन घर में शुद्धता बनाए रखें। जया एकादशी के दिन दान का भी विशेष फल है, इसलिए किसी जरूरतमंद को पीले फल या अनाज दान करना आपकी उन्नति के रास्ते खोल सकता है।