आपके शहर में 'निगम' है या 'पालिका'? चुनाव के शोर में समझिए दोनों का A-Z फर्क, आसान भाषा में

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महाराष्ट्र में हुए निकाय चुनावों के बाद एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज है। मुंबई जैसे महानगर में मेयर पद को लेकर पार्टियों में होड़ मची है। ऐसे में आम आदमी के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर ये नगर निगम (Municipal Corporation) और नगर पालिका (Municipality) क्या होती हैं, और इन दोनों में जमीन-आसमान का क्या फर्क है? आइए, आपकी इस उलझन को बेहद सरल शब्दों में सुलझाते हैं।

ये सरकारें आपके घर के सबसे करीब हैं

सबसे पहले यह समझिए कि ये दोनों ही 'स्थानीय सरकारें' हैं। इनका काम आपके रोजमर्रा के जीवन से सीधे तौर पर जुड़ा है, जैसे - आपके घर तक साफ पानी पहुंचाना, सड़कों की सफाई, टूटी-फूटी गलियों की मरम्मत, और पार्कों का रखरखाव। राज्य और केंद्र सरकार से अलग, इनका पूरा ध्यान सिर्फ अपने शहर या कस्बे के विकास पर होता है। शहर की आबादी और क्षेत्रफल के आधार पर यह तय होता है कि वहां नगर निगम काम करेगा या नगर पालिका।

नगर निगम (Municipal Corporation): महानगरों का 'बिग बॉस'

जहां लाखों की आबादी बसती है, उन बड़े और घनी आबादी वाले शहरों में नगर निगम का शासन होता है।

  • पहचान: यह उन शहरों में बनाया जाता है, जिनकी आबादी 5 लाख से अधिक होती है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, पुणे, लखनऊ जैसे सभी बड़े महानगर इसी श्रेणी में आते हैं।
  • संरचना: एक नगर निगम को कई छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा जाता है, जिन्हें 'वार्ड' कहते हैं। हर वार्ड की जनता अपने प्रतिनिधि को चुनती है, जिसे पार्षद (Councilor) कहा जाता है।
  • मुखिया: इसका राजनीतिक प्रमुख 'मेयर' या 'महापौर' होता है, जिसे या तो पार्षद अपने बीच से चुनते हैं या कुछ शहरों में सीधे जनता द्वारा चुना जाता है। वहीं, प्रशासनिक कामकाज की बागडोर एक  IAS अधिकारी के हाथ में होती है, जिसे 'नगर आयुक्त' (Municipal Commissioner) कहते हैं।
  • काम और कमाई: इनके पास बड़े अधिकार और भारी-भरकम बजट होता है। ये शहर में फ्लाईओवर, बड़े अस्पताल, और यूनिवर्सिटी जैसी बड़ी विकास योजनाएं चलाते हैं। इनकी कमाई का जरिया प्रॉपर्टी टैक्स, पानी का बिल, होर्डिंग और पार्किंग शुल्क होता है।

नगर पालिका (Municipality): मझोले शहरों की 'सरकार'

नगर पालिका मध्यम आकार के शहरों और कस्बों के लिए बनाई जाती है, जो महानगर बनने की राह पर होते हैं।

  • पहचान: यह उन कस्बों या शहरों में होती है, जिनकी आबादी 1 लाख से 5 लाख के बीच होती है।
  • संरचना: यहां भी वार्ड सिस्टम और पार्षद चुनाव होते हैं, लेकिन इसका आकार निगम से छोटा होता है।
  • मुखिया: इसके प्रमुख को 'अध्यक्ष' (Chairperson) कहा जाता है, जिसे पार्षद या सीधे जनता चुनती है। यहां नगर आयुक्त जैसा शक्तिशाली प्रशासनिक पद नहीं होता, उसकी जगह एक अधिशासी अधिकारी (Executive Officer) कामकाज देखता है।
  • काम और कमाई: इनका काम मुख्य रूप से शहर की साफ-सफाई, स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था, जन्म-मृत्यु का रिकॉर्ड रखना और छोटी सड़कों का निर्माण करना होता है। इनका बजट और अधिकार क्षेत्र नगर निगम की तुलना में सीमित होता है।

एक नजर में सबसे बड़े अंतर

आधारनगर निगम (Municipal Corporation)नगर पालिका (Municipality)
आबादी5 लाख से अधिक1 लाख से 5 लाख तक
राजनीतिक प्रमुखमहापौर (Mayor)अध्यक्ष (Chairperson)
प्रशासनिक प्रमुखनगर आयुक्त (IAS अधिकारी)अधिशासी अधिकारी (EO)
बजट और ताकतबहुत बड़ा और अधिकार ज्यादाअपेक्षाकृत छोटा और अधिकार सीमित
कार्यक्षेत्रबड़े प्रोजेक्ट्स, शहर की प्लानिंगबुनियादी सुविधाएं, सफाई, रखरखाव

तो अगली बार जब आप अपने शहर के निकाय चुनावों में वोट डालने जाएं, तो यह जरूर याद रखें कि आपका एक वोट सिर्फ एक पार्षद नहीं, बल्कि आपके शहर के पूरे विकास की दिशा तय करता है।