कलाई पर बंधा कलावा कहीं आपकी मुसीबत तो नहीं बढ़ा रहा? जानें इसे बदलने का सही समय और नियम

Post

News India Live, Digital Desk : अक्सर हम सब देखते हैं कि पूजा के बाद जब हाथ में कलावा बंध जाता है, तो हमें एक अजीब सा सुकून मिलता है। माना जाता है कि इसमें त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) और तीनों देवियों का वास होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शास्त्रों के अनुसार कलावा पहनने की एक निश्चित अवधि होती है?

कितने दिनों तक पहनना चाहिए कलावा?
पंडितों और जानकारों का मानना है कि कलावा को तब तक ही हाथ में रखना चाहिए जब तक कि उसका रंग साफ़ दिखे और वह गंदा न हुआ हो। जैसे ही धागा गलने लगे या उसका रंग पूरी तरह फीका पड़ जाए, तो इसे बदल देना चाहिए। वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो पुराना और गंदा धागा त्वचा के लिए भी अच्छा नहीं होता। आम तौर पर इसे 21 दिन या अगले त्योहार या किसी अगली पूजा तक बदलना शुभ माना जाता है।

बदलने का सही दिन क्या है?
अगर आपका कलावा पुराना हो गया है और आप उसे बदलना चाहते हैं, तो हफ्ते का कोई भी दिन न चुनें। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कलावा बदलने या उतारने के लिए मंगलवार और शनिवार के दिन को सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। इस दिन आप पुराना कलावा उतारकर भगवान के चरणों में अर्जी लगाकर नया कलावा धारण कर सकते हैं।

भूलकर भी न करें ये गलतियाँ:

  1. दाँतों का इस्तेमाल न करें: कलावा उतारते समय कभी भी इसे दाँतों से काटकर नहीं तोड़ना चाहिए। ऐसा करना अशुभ माना जाता है। हमेशा इसे धीरे से खोलें या हाथ से खींचकर (अगर सूती है) तोड़ें।
  2. यहाँ-वहाँ न फेंकें: पुराने कलावे को अक्सर लोग कूड़ेदान या सड़कों पर फेंक देते हैं। याद रखिये, इसमें देवी-देवताओं का आह्वान होता है। पुराने धागे को या तो किसी पीपल के पेड़ की जड़ में रख दें या फिर किसी पवित्र बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें।
  3. कलाई पर कितनी बार लपेटें: कलावा बांधते वक्त ध्यान रखें कि इसे पुरुष और अविवाहित महिलाओं के दाहिने हाथ में और शादीशुदा महिलाओं के बाएं हाथ में बांधना चाहिए। इसे कलाई पर 3 बार लपेटना बहुत शुभ माना जाता है।