बाजार का नकली घी तो नहीं बिगाड़ रहा आपकी सेहत? FSSAI ने बताया घर बैठे 2 मिनट में घी की शुद्धता
News India Live, Digital Desk : भारतीय रसोइयों में देसी घी का एक खास और पवित्र स्थान है। चाहे दाल में तड़का लगाना हो, रोटियों पर घी लगाना हो या भगवान का प्रसाद बनाना हो, शुद्ध देसी घी के बिना हर काम अधूरा लगता है। लेकिन बाजार में बढ़ती मांग के साथ ही घी में मिलावट का काला धंधा भी तेजी से फल-फूल रहा है। मुनाफे के लालच में कई कंपनियां घी में वनस्पति (डालडा), उबले हुए आलू, स्टार्च और यहां तक कि हानिकारक केमिकल भी मिला रही हैं। यह मिलावटी और नकली घी आपको अंदर ही अंदर गंभीर बीमारियों का शिकार बना सकता है। आम जनता की सेहत को ध्यान में रखते हुए, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने घर पर ही आसानी से घी की शुद्धता पहचानने के कुछ बेहद सरल और वैज्ञानिक तरीके साझा किए हैं। आइए जानते हैं कि कैसे आप बिना किसी महंगी लैब के, अपनी रसोई में ही असली और नकली घी की पहचान कर सकते हैं।
हथेली पर पिघलाने वाला टेस्ट (Palm Test) घी की शुद्धता जांचने का यह सबसे बुनियादी और आसान तरीका है। शुद्ध देसी घी हमारे शरीर के सामान्य तापमान पर बहुत जल्दी पिघलने लगता है। अपनी हथेली पर आधा चम्मच घी रखें और कुछ सेकंड तक ध्यान से देखें। अगर घी तुरंत पिघलकर लिक्विड (द्रव) रूप में आ जाता है और उसमें कोई चिपचिपाहट नहीं होती, तो आपका घी बिल्कुल असली और शुद्ध है। वहीं, अगर घी पिघलने में काफी समय लगाता है, हथेली पर जमा ही रहता है या आपको रगड़ने पर चिपचिपा (Greasy) महसूस होता है, तो समझ लीजिए कि उसमें वनस्पति (हाइड्रोजनीकृत वसा) या किसी अन्य सस्ते तेल की मिलावट की गई है।
हीट टेस्ट (Heat Test) से तुरंत करें असली-नकली की पहचान अगर आपको घी की क्वालिटी पर थोड़ा भी शक है, तो एक बर्तन या बड़े चम्मच में थोड़ा सा घी लें और उसे गैस पर धीमी आंच पर गर्म करें। अगर घी तुरंत पिघलकर गहरे भूरे (Brown) रंग का हो जाता है और उसमें से एक सोंधी, भुनी हुई और प्राकृतिक खुशबू आने लगती है, तो यह 100% शुद्ध देसी घी है। इसके विपरीत, अगर घी को पिघलने में जरूरत से ज्यादा वक्त लगता है, पिघलने के बाद उसका रंग हल्का पीला हो जाता है और उसमें काफी झाग बनने लगता है, तो यह स्पष्ट संकेत है कि आप जो घी खा रहे हैं वह नकली और मिलावटी है।
स्टार्च और आलू की मिलावट पकड़ने के लिए 'आयोडीन टेस्ट' अक्सर घी की मात्रा बढ़ाने और उसे असली जैसा दानेदार दिखाने के लिए मिलावटखोर उसमें शकरकंद या उबले हुए आलू का स्टार्च मिला देते हैं। FSSAI के मुताबिक, इस खतरनाक मिलावट को पकड़ने के लिए घर पर 'आयोडीन टेस्ट' सबसे कारगर है। इसके लिए एक चम्मच पिघले हुए घी को कांच के पारदर्शी बाउल में लें। अब इसमें आयोडीन टिंचर (Iodine Tincture) की 2-3 बूंदें डालें और इसे अच्छी तरह मिलाएं। अगर आयोडीन डालने के बाद घी का रंग बदलकर नीला या जामुनी (पर्पल) हो जाता है, तो यह इस बात का पक्का सबूत है कि घी में स्टार्च की भारी मिलावट की गई है। शुद्ध गाय या भैंस के घी का रंग आयोडीन डालने पर भी बिल्कुल नहीं बदलता है।
वनस्पति (डालडा) की पहचान के लिए FSSAI का 'एसिड टेस्ट' घी में वनस्पति या हाइड्रोजनीकृत वसा की मिलावट सेहत के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक होती है, जो सीधा आपके कोलेस्ट्रॉल और दिल पर असर डालती है। इसे पकड़ने के लिए FSSAI ने एक खास तरीका बताया है। एक पारदर्शी टेस्ट ट्यूब या छोटे कांच के बर्तन में 1 ml पिघला हुआ घी लें। इसमें 1 ml हाइड्रोक्लोरिक एसिड (HCl) और आधा चम्मच सामान्य चीनी मिलाएं। अब इस मिश्रण को लगभग 2 मिनट तक तेजी से हिलाएं और कुछ देर के लिए यूं ही छोड़ दें। अगर बर्तन के निचले हिस्से (एसिड वाली परत) का रंग लाल या गहरा गुलाबी हो जाता है, तो घी में वनस्पति की मिलावट है। अगर रंग में कोई भी बदलाव नहीं आता है, तो आपका घी खाने के लिए पूरी तरह सुरक्षित और शुद्ध है।