पीरियड्स में गायत्री मंत्र पढ़ना पाप है या पुण्य? जान लीजिए सच वरना अनजाने में हो जाएगी गलती

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News India Live, Digital Desk : हमारी संस्कृति में गायत्री मंत्र को 'महामंत्र' का दर्जा दिया गया है। ऐसा माना जाता है कि जो शक्ति और ऊर्जा इस एक मंत्र में है, वह किसी और में नहीं। लेकिन अक्सर हमारे घरों में माताओं और बहनों के मन में एक सवाल खटकता रहता है और वह है मासिक धर्म (Periods) के दौरान पूजा-पाठ के नियम।

खासकर जब बात गायत्री मंत्र की आती है, तो दुविधा और बढ़ जाती है। मन करता है ईश्वर को याद करने का, लेकिन डर लगता है कि कहीं अनजाने में कोई पाप या गलती न हो जाए। आज हम इसी उलझन को बहुत ही सरल भाषा में सुलझाने की कोशिश करेंगे।

गायत्री मंत्र क्यों है इतना खास?
पहले यह समझिए कि गायत्री मंत्र कोई साधारण प्रार्थना नहीं है। यह एक वैदिक मंत्र है। शास्त्रों के अनुसार, वैदिक मंत्रों का उच्चारण करने से हमारे शरीर और आसपास के वातावरण में एक विशेष तरह की गर्मी (Energy) और कंपन पैदा होता है। इसके अपने सख्त नियम होते हैं, जिनमें सबसे ऊपर है शारीरिक और बाहरी पवित्रता (Physical Purity)

पीरियड्स के दौरान क्या बदल जाता है?
मासिक धर्म महिलाओं के शरीर की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन सनातन परंपरा में इसे शरीर की 'शुद्धि' का समय माना जाता है। इस दौरान शरीर से ऊर्जा बाहर निकल रही होती है और शरीर थोड़ा कमजोर या संवेदनशील होता है।

तो क्या जाप करना मना है? (What Experts Say)
धर्म और ज्योतिष के जानकारों की मानें तो पीरियड्स के दौरान गायत्री मंत्र का जोर-जोर से बोलकर (वाचिक) जाप या माला लेकर विधिवत अनुष्ठान करना साफ मना है।
इसका कारण यह है कि इस मंत्र के उच्चारण के लिए जिस स्तर की शारीरिक शुद्धि और ऊर्जा को संभालने की जरूरत होती है, वह इन 5-7 दिनों में संभव नहीं हो पाती।

...लेकिन एक रास्ता है! (मानसिक जाप)
ईश्वर तो भाव का भूखा होता है, है न? अगर आपका नियम है कि आप बिना पूजा किए रह नहीं सकतीं, तो उसका भी उपाय है। ज्यादातर विद्वान यह मानते हैं कि आप मानसिक जाप (Mental Chanting) कर सकती हैं।

  • मानसिक जाप का मतलब: होठों को हिलाए बिना, बिना आवाज निकाले, मन ही मन मंत्र को दोहराना।
  • मन कभी अशुद्ध नहीं होता। अगर आप मन ही मन गायत्री मंत्र का स्मरण करती हैं, तो उसमें कोई दोष नहीं माना जाता।

व्यावहारिक सलाह

  • मंदिर को न छुएं: इन दिनों में घर के मंदिर में मूर्ति को छूने या पूजा की सामग्री को हाथ लगाने से बचें।
  • सरल मंत्र चुनें: अगर गायत्री मंत्र को लेकर मन में संशय या डर बना रहता है, तो सबसे अच्छा है कि इन दिनों में आप सिर्फ 'ओम नमो भगवते वासुदेवाय' या 'राम-राम' का नाम जपें। ये नाम मंत्र हैं और इनके लिए किसी सख्त नियम की जरूरत नहीं होती।