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April 05 2026 12:27 pm

होरमुज जलडमरूमध्य में ईरान की एंट्री फीस हर जहाज से मांगे 20 लाख डॉलर, क्या ठप हो जाएगा दुनिया का समुद्री व्यापार?

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News India Live, Digital Desk:  मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अब समुद्र के रास्ते एक नया आर्थिक युद्ध छिड़ता नजर आ रहा है। लाल सागर में हूतियों के हमलों के बाद अब ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होरमुज' (Strait of Hormuz) पर अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान अब इस रास्ते से गुजरने वाले हर मालवाहक जहाज से करीब 20 लाख डॉलर (लगभग 16.5 करोड़ रुपये) की भारी-भरकम राशि वसूलने की तैयारी में है। ईरान के इस कदम ने अमेरिका, इजरायल समेत पूरी दुनिया की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

ईरान का नया दांव: सुरक्षा के नाम पर वसूली?

ईरान की संसद में पेश किए गए एक नए विधेयक के अनुसार, तेहरान प्रशासन होरमुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों पर 'ट्रांजिट शुल्क' लगाने की योजना बना रहा है। ईरान का तर्क है कि वह इस क्षेत्र में सुरक्षा प्रदान करता है और पर्यावरण की रक्षा करता है, जिसके बदले उसे यह शुल्क मिलना चाहिए। हालांकि, जानकारों का मानना है कि यह सीधे तौर पर अमेरिका और पश्चिमी देशों पर दबाव बनाने की एक रणनीति है। अगर यह कानून लागू होता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति और माल ढुलाई पर इसका गहरा असर पड़ेगा।

कच्चे तेल की कीमतों में आ सकता है भारी उछाल

स्ट्रेट ऑफ होरमुज दुनिया का वह 'चोक पॉइंट' है जहां से दुनिया के कुल तेल निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और इराक जैसे बड़े तेल उत्पादक देश इसी रास्ते का उपयोग करते हैं। यदि ईरान प्रति जहाज 20 लाख डॉलर वसूलना शुरू करता है, तो शिपिंग कंपनियां इस बोझ को ग्राहकों पर डालेंगी, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। भारत जैसे देशों के लिए, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग पर निर्भर हैं, यह खबर किसी झटके से कम नहीं है।

अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ेगा टकराव

ईरान के इस कदम को अमेरिका और इजरायल के खिलाफ एक 'आर्थिक घेराबंदी' के रूप में देखा जा रहा है। अमेरिका पहले ही इस क्षेत्र में अपनी नौसैनिक उपस्थिति बढ़ा चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के तहत 'इनोसेंट पैसेज' (Innocent Passage) के अधिकार के कारण कोई भी देश इस तरह का मनमाना शुल्क नहीं वसूल सकता। ऐसे में ईरान की यह जिद खाड़ी क्षेत्र में सैन्य टकराव की स्थिति पैदा कर सकती है। इजरायल-हमास युद्ध के बीच ईरान का यह नया मोर्चा पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिलाने की क्षमता रखता है।