BREAKING:
March 13 2026 08:28 pm

Iran War Strategy : कौन हैं अली जाफरी? जिन्होंने ईरान की हार को बना दिया असंभव अमेरिका और इजरायल भी रह गए हैरान

Post

News India Live, Digital Desk: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध के बीच एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है मेजर जनरल मोहम्मद अली जाफरी (Mohammad Ali Jafari)। यह वही शख्स हैं जिन्होंने ईरान के रक्षा ढांचे को इस तरह डिजाइन किया है कि अमेरिका और इजरायल जैसी महाशक्तियां भी उसे पूरी तरह धराशायी करने में नाकाम साबित हो रही हैं।

कौन हैं मेजर जनरल मोहम्मद अली जाफरी?

अली जाफरी 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) के पूर्व कमांडर-इन-चीफ रहे हैं। उन्होंने अपना सैन्य करियर 1979 की ईरानी क्रांति के बाद शुरू किया और ईरान-इराक युद्ध के दौरान अपनी रणनीतिक सूझबूझ से तेजी से रैंकों में ऊपर चढ़े। 2007 से 2019 तक उन्होंने IRGC के प्रमुख के रूप में ईरान की सैन्य शक्ति को नया रूप दिया।

इराक युद्ध की हार से सीखा सबक

2003 में जब अमेरिका ने इराक पर हमला किया, तो सद्दाम हुसैन की विशाल सेना महज 26 दिनों में ताश के पत्तों की तरह ढह गई। अली जाफरी ने इस हार का बारीकी से अध्ययन किया और पाया कि इराक की सबसे बड़ी कमजोरी उसका 'अत्यधिक केंद्रीकृत कमान ढांचा' (Highly Centralized Command) था। सद्दाम के खत्म होते ही पूरी सेना दिशाहीन हो गई। जाफरी ने कसम खाई कि वे ईरान का हश्र इराक जैसा नहीं होने देंगे।

क्या है 'मोजैक डिफेंस' (Mosaic Defence)?

जाफरी ने एक ऐसी सैन्य रणनीति तैयार की जिसे 'मोजैक डिफेंस' कहा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य ईरान को एक 'हाइड्रा' (एक ऐसा पौराणिक जीव जिसका एक सिर काटने पर कई और निकल आते हैं) की तरह बनाना था।

सत्ता का विकेंद्रीकरण: उन्होंने ईरान को 31 प्रांतों के आधार पर 31 अर्ध-स्वतंत्र कमानों में बांट दिया।

स्वतंत्र इकाइयां: हर प्रांत का अपना स्वतंत्र मुख्यालय, संचार प्रणाली, खुफिया तंत्र और मिसाइल-ड्रोन भंडार है।

ऑटोपायलट मोड: इस सिस्टम की खासियत यह है कि अगर तेहरान में बैठा शीर्ष नेतृत्व (सुप्रीम लीडर या जनरल) खत्म भी हो जाए, तो भी युद्ध नहीं रुकता। हर क्षेत्रीय यूनिट पहले से तय 'डिस्ट्रक्शन प्लान' के तहत स्वतंत्र रूप से हमला जारी रखती है।

अमेरिका क्यों रह गया कन्फ्यूज?

28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' (Operation Epic Fury) लॉन्च किया, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और कई शीर्ष जनरल मारे गए। अमेरिका को लगा कि नेतृत्व खत्म होते ही ईरान घुटने टेक देगा, लेकिन हुआ इसके उलट:

पलटवार की तीव्रता बढ़ी: नेतृत्व खोने के बावजूद ईरान की मिसाइल और ड्रोन यूनिट्स ने स्वतंत्र रूप से अमेरिका के क्षेत्रीय ठिकानों और इजरायल पर हमले तेज कर दिए।

अदृश्य दुश्मन: कोई एक मुख्य कमान केंद्र न होने के कारण अमेरिकी इंटेलिजेंस यह समझ ही नहीं पा रही है कि हमले कहां से और किसके आदेश पर हो रहे हैं।