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March 14 2026 06:44 am

युद्ध ट्वीट से नहीं जीते जाते अली लारीजानी ने डोनाल्ड ट्रंप को दी सीधी चेतावनी, ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर

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News India Live, Digital Desk: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण संघर्ष के बीच ईरान के 'सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल' के सचिव अली लारीजानी (Ali Larijani) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) पर तीखा पलटवार किया है। लारीजानी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि युद्ध की शुरुआत करना आसान हो सकता है, लेकिन इसे महज सोशल मीडिया पोस्ट या ट्वीट्स के जरिए खत्म नहीं किया जा सकता।

"ट्वीट्स से नहीं रुकती जंग": लारीजानी का कड़ा संदेश

दरअसल, राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में दावा किया था कि अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की शक्ति लगभग समाप्त हो गई है और यह युद्ध जल्द ही खत्म हो जाएगा। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए लारीजानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर लिखा:

"ट्रंप का दावा है कि वे त्वरित जीत चाहते हैं। लेकिन उन्हें समझना चाहिए कि युद्ध कोई डिजिटल गेम नहीं है। इसे चंद ट्वीट्स से खत्म नहीं किया जा सकता। जब तक आप अपनी भारी गलती की पूरी कीमत नहीं चुका देते, हम पीछे नहीं हटेंगे।"

विवाद के 3 प्रमुख कारण: क्यों भड़का है ईरान?

नेतृत्व की क्षति का बदला: 28 फरवरी 2026 को हुए हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद ईरान में भारी आक्रोश है। लारीजानी ने इसे एक "अपूरणीय क्षति" बताते हुए कड़े इंतकाम की शपथ ली है।

ऊर्जा ढांचे पर खतरा: ट्रंप ने धमकी दी थी कि अमेरिका एक घंटे के भीतर ईरान की पूरी बिजली व्यवस्था ठप्प कर सकता है। इसके जवाब में ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उनके ग्रिड को छुआ गया, तो वे पूरे क्षेत्र की ऊर्जा आपूर्ति बाधित कर देंगे।

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): ईरान ने संकेत दिया है कि वह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग को बंद कर सकता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में हाहाकार मच सकता है।

ट्रंप का बेबाक अंदाज: "मुझे परवाह नहीं"

ईरान की इन धमकियों के बीच डोनाल्ड ट्रंप अपने आक्रामक रुख पर कायम हैं। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि उन्हें लारीजानी की धमकियों से कोई फर्क नहीं पड़ता और ईरान के पास अब 'बिना शर्त आत्मसमर्पण' के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है।

क्या एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की ओर बढ़ रही है दुनिया?

लारीजानी का यह बयान इस बात का संकेत है कि ईरान इस संघर्ष को लंबा खींचने (War of Attrition) के लिए तैयार है। उन्होंने पड़ोसी देशों को भी सचेत किया है कि अगर उनकी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हुआ, तो परिणाम गंभीर होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच यह 'जुबानी जंग' कभी भी एक बड़े जमीनी टकराव का रूप ले सकती है