Iran War 2026 : जल्द खत्म होगा अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन, राष्ट्रपति ट्रंप के बयान के बाद नरम पड़े ईरान के तेवर
News India Live, Digital Desk: पश्चिम एशिया (West Asia) में पिछले कुछ दिनों से जारी भीषण युद्ध के बाद आखिरकार शांति की उम्मीद जागी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा बयान देते हुए संकेत दिया है कि अमेरिका का सैन्य ऑपरेशन अब अपने अंतिम चरण में है और यह बहुत जल्द समाप्त हो जाएगा। ट्रंप के इस रुख के बाद ईरान के तेवरों में भी नरमी देखी गई है, जिससे दुनिया ने राहत की सांस ली है।
ट्रंप का 'मिशन मोड': "हमारा काम लगभग पूरा"
व्हाइट हाउस से जारी एक संदेश में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ने अपने निर्धारित लक्ष्यों को सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका किसी लंबे युद्ध का हिस्सा नहीं बनना चाहता। ट्रंप ने कहा, "हमारा ऑपरेशन बहुत जल्द खत्म होने वाला है। हमने अपनी शक्ति दिखा दी है और अब समय आ गया है कि क्षेत्र में स्थिरता वापस आए।" रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान वैश्विक दबाव और घरेलू राजनीति को संतुलित करने की एक कोशिश है।
ईरान के बदले सुर: बातचीत का रास्ता खुला?
ट्रंप की इस घोषणा के कुछ ही घंटों बाद ईरान की ओर से भी सकारात्मक प्रतिक्रिया आई है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने अपने एक बयान में कहा कि यदि अमेरिका अपनी 'आक्रामक नीतियां' रोकता है, तो ईरान भी तनाव कम करने के लिए तैयार है। तेहरान ने संकेत दिया है कि वह हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर अपने कड़े रुख पर पुनर्विचार कर सकता है। यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कल तक ईरान अमेरिकी कंपनियों को निशाना बनाने की धमकी दे रहा था।
वैश्विक बाजार और कच्चे तेल पर असर
शांति की इन खबरों का असर तुरंत वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिखाई दिया है:
कच्चा तेल: युद्ध टलने की उम्मीद में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में 4-5% की गिरावट दर्ज की गई है।
शेयर बाजार: अमेरिकी और एशियाई बाजारों में रौनक लौट आई है। विशेष रूप से उन 18 अमेरिकी कंपनियों के शेयरों में सुधार हुआ है जिन्हें ईरान ने निशाने पर लिया था।
सोना: सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की बढ़ती कीमतों पर भी थोड़ा ब्रेक लगा है।
क्या वाकई थम जाएगा युद्ध?
हालांकि दोनों तरफ से बयानबाजी नरम हुई है, लेकिन जमीन पर स्थिति अभी भी संवेदनशील है। राजनयिकों का मानना है कि असली चुनौती 'सीजफायर' (युद्धविराम) की शर्तों को लागू करने में होगी। संयुक्त राष्ट्र (UN) और खाड़ी देश इस समय मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य में दोबारा ऐसी स्थिति पैदा न हो।