Iran-US War : क्या ईरान के सामने झुकेंगे डोनाल्ड ट्रंप? आज रात राष्ट्र के नाम संबोधन पर टिकी दुनिया की नजरें
News India Live, Digital Desk: पश्चिम एशिया में जारी भीषण तनाव और युद्ध के मुहाने पर खड़े हालातों के बीच अमेरिकी राजनीति में बड़ा मोड़ आ गया है। ईरान द्वारा गूगल, एपल और मेटा जैसी 18 दिग्गज अमेरिकी कंपनियों को 'सैन्य लक्ष्य' घोषित करने के बाद, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आज रात एक विशेष 'संबोधन' (Address to the Nation) करने जा रहे हैं। वैश्विक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि क्या ट्रंप ईरान के साथ किसी समझौते की ओर बढ़ रहे हैं या यह किसी बड़े सैन्य पलटवार की तैयारी है।
ईरान की 'डिजिटल वॉर' और ट्रंप का दबाव
ईरान ने खुलेआम धमकी दी है कि वह अमेरिकी टेक कंपनियों को निशाना बनाएगा, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंच सकता है। ट्रंप प्रशासन पर इस समय दोहरा दबाव है:
कंपनियों की सुरक्षा: गूगल, एपल और मेटा जैसी कंपनियों के अरबों डॉलर के निवेश और कर्मचारियों की जान बचाना।
सप्लाई चेन: अगर इन कंपनियों पर हमला होता है, तो पूरी दुनिया में इंटरनेट और संचार सेवाएं ठप हो सकती हैं।
क्या होगा ट्रंप के संबोधन का मुख्य एजेंडा?
राजनयिक सूत्रों के अनुसार, ट्रंप अपने भाषण में निम्नलिखित बिंदुओं पर बात कर सकते हैं:
शांति का प्रस्ताव: क्या अमेरिका कुछ प्रतिबंधों में ढील देकर ईरान को शांत करने की कोशिश करेगा?
हॉर्मुज जलडमरूमध्य: हॉर्मुज के रास्ते को खुला रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय गठबंधन की घोषणा।
अमेरिकी कंपनियों का बचाव: कंपनियों को दी जाने वाली अतिरिक्त सुरक्षा और साइबर डिफेंस पर अपडेट।
युद्ध का अंत: ट्रंप पहले ही संकेत दे चुके हैं कि वे इस ऑपरेशन को लंबा नहीं खींचना चाहते।
वैश्विक बाजार में 'सन्नाटा' और अनिश्चितता
ट्रंप के संबोधन से पहले वॉल स्ट्रीट से लेकर एशियाई बाजारों तक एक अजीब सा सन्नाटा पसरा हुआ है। निवेशक डरे हुए हैं कि अगर ट्रंप ने कड़े रुख का ऐलान किया, तो कच्चा तेल (Crude Oil) रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच सकता है। वहीं, अगर वे 'सरेंडर' या नरमी के संकेत देते हैं, तो इसे अमेरिकी वैश्विक प्रभुत्व के लिए एक झटका माना जाएगा।
ईरान की प्रतिक्रिया पर नजर
ईरान ने पहले ही अपने तेवर नरम किए हैं, लेकिन वह ट्रंप के इस संबोधन का इंतजार कर रहा है। तेहरान की ओर से संकेत मिले हैं कि अगर अमेरिका उनकी शर्तों को मानता है, तो वे अपनी 'हिट लिस्ट' से कंपनियों के नाम हटा सकते हैं।