Punjab Politics : एचएस फुल्का बीजेपी में शामिल, सीएम भगवंत मान का तीखा हमला, कहा जनता का भरोसा तोड़ा
News India Live, Digital Desk: पंजाब की राजनीति में आज एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व दिग्गज नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता हरविंदर सिंह फुल्का (HS Phoolka) करीब सात साल के राजनीतिक वनवास के बाद सक्रिय राजनीति में लौट आए हैं। उन्होंने बुधवार, 1 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया। 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों को न्याय दिलाने की लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने वाले फुल्का के इस कदम ने पंजाब की सियासत में हलचल पैदा कर दी है।
दिल्ली में हुई 'केसरिया' एंट्री
बीजेपी मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान एचएस फुल्का ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस दौरान केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, पंजाब बीजेपी अध्यक्ष सुनील जाखड़ और केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू मौजूद रहे। फुल्का ने कहा कि वे देश के विकास और पंजाब के हितों के लिए प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों से प्रभावित होकर बीजेपी में शामिल हुए हैं। माना जा रहा है कि 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले बीजेपी उन्हें एक बड़े 'सिख चेहरे' के रूप में पेश कर सकती है।
सीएम भगवंत मान का पलटवार: "विश्वासघात का नया नाम"
एचएस फुल्का के बीजेपी में शामिल होते ही पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उन पर सीधा हमला बोला। सीएम मान ने इस कदम को 'भरोसे का कत्ल' करार दिया है।
मान का बयान: "आम आदमी पार्टी ने उन्हें 2017 में विपक्ष का नेता (LoP) बनाया था, लेकिन उन्होंने पद और विधायकी (दाखा सीट) दोनों से इस्तीफा दे दिया। मैंने आज तक ऐसा कोई व्यक्ति नहीं देखा जो उन लोगों का भरोसा तोड़े जिन्होंने उसे चुना हो और फिर वह चुनाव जीत जाए। उनके लिए मेरी शुभकामनाएं हैं, लेकिन जनता सब याद रखती है।"
पार्टी से दूरी: सीएम मान ने याद दिलाया कि फुल्का ने 2019 में राजनीति को 'गलती' बताते हुए आप छोड़ी थी, लेकिन अब उनका बीजेपी में जाना उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को दर्शाता है।
कौन हैं एचएस फुल्का? (Political Timeline)
2014: आम आदमी पार्टी के टिकट पर लुधियाना से लोकसभा चुनाव लड़ा (हार गए)।
2017: लुधियाना की दाखा सीट से विधानसभा चुनाव जीते और पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बने।
2018: वकालत पर ध्यान देने और दंगों के केस लड़ने के लिए विधायक पद से इस्तीफा दिया।
2019: आधिकारिक तौर पर 'आप' से नाता तोड़ा और 'पद्म श्री' से सम्मानित हुए।
2026: सक्रिय राजनीति में वापसी करते हुए बीजेपी में शामिल हुए।
पंजाब चुनाव 2027 के लिए क्या हैं मायने?
फुल्का के आने से बीजेपी को पंजाब के मालवा और शहरी सिख क्षेत्रों में मजबूती मिल सकती है। विशेषकर 1984 के दंगों के मुद्दे पर उनकी पकड़ का लाभ बीजेपी कांग्रेस को घेरने के लिए करेगी। वहीं, आम आदमी पार्टी के लिए यह एक मनोवैज्ञानिक चुनौती है, क्योंकि फुल्का पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने भी इस पर चुटकी लेते हुए कहा कि 'आप' के जहाज से पुराने साथी अब किनारा कर रहे हैं।