Iran Oil Export : क्या खार्ग द्वीप पर हमले से ढह जाएगी ईरान की अर्थव्यवस्था? जानिए क्यों इजरायल के निशाने पर है यह छोटा सा टापू
News India Live, Digital Desk: पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग अब एक ऐसे मोड़ पर आ गई है जहाँ एक छोटी सी चूक पूरे देश को कंगाली की कगार पर धकेल सकती है। इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच 'खार्ग द्वीप' (Kharg Island) का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस द्वीप पर आंच आई, तो ईरान की आर्थिक कमर पूरी तरह टूट जाएगी।
क्यों खास है खार्ग द्वीप? (Iran's Economic Lifeline)
खार्ग द्वीप ईरान के लिए सिर्फ जमीन का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि उसकी अर्थव्यवस्था की 'धड़कन' है। फारस की खाड़ी में स्थित यह द्वीप ईरान के कच्चे तेल के निर्यात का सबसे बड़ा केंद्र है।
90% तेल निर्यात: ईरान अपने कुल कच्चे तेल के निर्यात का लगभग 90 फीसदी हिस्सा इसी द्वीप के जरिए दुनिया भर में भेजता है।
विशाल टर्मिनल: यहाँ दुनिया के सबसे बड़े तेल टर्मिनलों में से एक स्थित है, जहाँ से विशाल टैंकरों में तेल भरा जाता है।
कमाई का जरिया: ईरान की जीडीपी और विदेशी मुद्रा भंडार का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी द्वीप से होने वाले व्यापार पर निर्भर है।
इजरायल के निशाने पर खार्ग द्वीप ही क्यों?
इजरायल अच्छी तरह जानता है कि ईरान को सैन्य रूप से हराने से ज्यादा प्रभावी उसे आर्थिक रूप से पंगु बनाना है।
एक झटके में तबाही: अगर इजरायल खार्ग द्वीप के इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाता है, तो ईरान का तेल निर्यात पूरी तरह ठप हो जाएगा।
घरेलू संकट: तेल की कमाई बंद होने से ईरान में महंगाई चरम पर पहुँच जाएगी और सरकार के लिए युद्ध का खर्च उठाना नामुमकिन हो जाएगा।
ग्लोबल प्रेशर: हालांकि, इस द्वीप पर हमले से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $100 के पार जा सकती हैं, जिससे पूरी दुनिया में हाहाकार मच सकता है।
क्या होगा अगर हमला हुआ?
अगर खार्ग द्वीप पर हमला होता है, तो इसका असर सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। भारत समेत दुनिया के कई देशों में पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू सकते हैं। यही वजह है कि अमेरिका और अन्य देश इजरायल को तेल ठिकानों पर हमला न करने की सलाह दे रहे हैं।