Iran-Israel War : कौन थे अली लारीजानी? इजरायली हमले में मारे गए ईरान के संकटमोचक, जिनकी मौत ने तेहरान को हिला दिया
News India Live, Digital Desk: मध्य पूर्व (Middle East) में जारी संघर्ष ने अब एक ऐसा मोड़ ले लिया है जहाँ से वापसी मुमकिन नहीं लगती। ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव और सबसे प्रभावशाली रणनीतिकारों में से एक, अली लारीजानी (Ali Larijani) की इजरायली एयरस्ट्राइक में मौत हो गई है। यह हमला केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि ईरान के सत्ता केंद्र पर किया गया सबसे बड़ा प्रहार है।
कैसे हुआ 'ऑपरेशन लारीजानी'?
इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद और वायुसेना ने एक संयुक्त ऑपरेशन के तहत तेहरान के बाहरी इलाके में स्थित एक सुरक्षित परिसर (Safe House) को निशाना बनाया।
सटीक निशाना: इजरायली मीडिया के अनुसार, लारीजानी वहां एक गोपनीय उच्च स्तरीय बैठक कर रहे थे।
बड़ी क्षति: इस हमले में न केवल लारीजानी, बल्कि उनके साथ मौजूद कई अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और उनके परिवार के सदस्य भी मारे गए हैं। इजरायल ने इसे "आतंक के मास्टरमाइंड का अंत" करार दिया है।
ईरान की राजनीति के 'चाणक्य' थे लारीजानी
अली लारीजानी का कद ईरान में किसी राष्ट्रपति से कम नहीं था। वे एक मंझे हुए राजनीतिज्ञ और कूटनीतिज्ञ थे।
परमाणु कार्यक्रम के रक्षक: वे लंबे समय तक ईरान के मुख्य परमाणु वार्ताकार रहे और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ईरान का पक्ष मजबूती से रखा।
संसद के 'भीष्म पितामह': लारीजानी लगातार 12 वर्षों तक ईरानी संसद (Majlis) के स्पीकर रहे, जो उनकी राजनीतिक स्वीकार्यता को दर्शाता है।
खामेनेई के सबसे करीबी: पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई उन पर अटूट विश्वास करते थे। खामेनेई की मृत्यु के बाद, लारीजानी ही वह कड़ी थे जो नए नेतृत्व और सेना के बीच संतुलन बनाए हुए थे।
क्षेत्रीय राजनीति पर असर
लारीजानी की मौत के बाद ईरान के भीतर और बाहर के समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं:
हिजबुल्ला और हमास: लारीजानी इन समूहों को रणनीतिक और सैन्य मदद पहुँचाने वाले मुख्य सूत्रधार थे। उनकी अनुपस्थिति में इन संगठनों को मिलने वाली मदद प्रभावित हो सकती है।
सत्ता संघर्ष: तेहरान में अब कट्टरपंथियों और अपेक्षाकृत नरमपंथियों के बीच एक नया सत्ता संघर्ष शुरू होने की आशंका है।
'खतरनाक होगा अंजाम' - ईरान की चेतावनी
ईरान के कार्यवाहक नेतृत्व ने लारीजानी की मौत पर तीन दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने बयान जारी कर कहा है कि "इजरायल ने अपनी बर्बादी के वारंट पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।" पूरे खाड़ी क्षेत्र में ईरानी मिसाइल यूनिट्स को 'रेड अलर्ट' पर रखा गया है, जिससे एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का खतरा और बढ़ गया है।