ईरान सुलग रहा है, और अमेरिका ने कसी नकेल जानिए क्या हो रहा है सरहदों के उस पार
News India Live, Digital Desk: ईरान से जो तस्वीरें और खबरें आ रही हैं, वे किसी को भी बेचैन करने के लिए काफी हैं। वहां की सड़कें पिछले कुछ समय से आम लोगों के गुस्से और आंसुओं की गवाह बनी हुई हैं। विरोध प्रदर्शन, पुलिस की लाठियां और बढ़ता हुआ मौत का आंकड़ा यह सब देखकर दुनिया भर के लोग चिंतित हैं।
इसी बीच, अमेरिका ने एक बड़ा कदम उठाया है। वहां हो रही हिंसा और मानवाधिकारों (Human Rights) के हनन को देखते हुए, अमेरिका ने ईरान पर कुछ नई और सख्त पाबंदियां (Sanctions) लगा दी हैं।
आइए, जरा आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर मामला क्या है और इन पाबंदियों का मतलब क्या है।
मौत का बढ़ता आंकड़ा और अमेरिका का गुस्सा
ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शन अब एक लड़ाई में बदल चुके हैं। रिपोर्ट्स बताती हैं कि प्रदर्शनों को कुचलने की कोशिश में कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। मरने वालों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे हैं, लेकिन हकीकत यही है कि नुकसान आम इंसान का हो रहा है।
अमेरिका का कहना है कि ईरान की सरकार अपने ही नागरिकों की आवाज को दबाने के लिए बल का प्रयोग कर रही है, जो गलत है। इसी के जवाब में अमेरिका ने उन अधिकारियों और संस्थाओं पर पाबंदियां लगाई हैं, जो इस हिंसा के लिए जिम्मेदार माने जा रहे हैं।
इन पाबंदियों से क्या बदलेगा?
अब सवाल यह उठता है कि क्या इन 'सेंक्शंस' से ईरान की सड़कों पर शांति आ जाएगी? देखिए, पाबंदियों का असर सीधा किसी भी देश की 'पावर' और 'पैसों' पर पड़ता है। अमेरिका का मकसद ईरान की सरकार पर आर्थिक और कूटनीतिक दबाव बनाना है ताकि वो हिंसा रोके।
लेकिन इसका एक दूसरा पहलू भी है। अक्सर जब हाथी लड़ते हैं, तो घास ही कुचली जाती है। इन पाबंदियों का असर कहीं न कहीं वहां की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा, जिससे आम ईरानी जनता की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं, जो पहले ही महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रही है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल स्थिति काफी तनावपूर्ण है। एक तरफ ईरान की जनता है जो पीछे हटने को तैयार नहीं, दूसरी तरफ वहां की सरकार है जो झुकना नहीं चाहती, और अब तीसरी तरफ अमेरिका और पश्चिमी देश हैं जो दूर से ही सही, लेकिन इस आग में अपना दखल दे रहे हैं।
हम बस यही उम्मीद कर सकते हैं कि यह हिंसा जल्द थमे और बातचीत का रास्ता निकले, क्योंकि अंत में जान किसी की भी जाए, हार इंसानियत की ही होती है।