यूपी में बन रहे हैं इंटीग्रेटेड कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत ने दी ये ऐतिहासिक सौगात

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News India Live, Digital Desk: अगर आपने कभी कोर्ट-कचहरी का मुँह देखा है, तो आप उस दर्द को बखूबी समझते होंगे। तारीख पर जाना, वकीलों को ढूँढना, कभी इस बिल्डिंग में भागना तो कभी उस बिल्डिंग में टाइपिंग वाले के पास जाना। गर्मी, भीड़ और परेशानी यही अदालतों की पुरानी पहचान बन गई थी। लेकिन अब उत्तर प्रदेश में यह तस्वीर बदलने वाली है, और वो भी बहुत शानदार तरीके से।

क्या है यह नई खुशखबरी?

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए उत्तर प्रदेश के 6 जिलों में 'एकीकृत न्यायालय परिसर' (Integrated Court Complexes) की आधारशिला रखी है। यह सिर्फ एक इमारत का शिलान्यास नहीं है, बल्कि आम जनता को राहत देने की एक बड़ी पहल है।

आखिर यह 'इंटीग्रेटेड कोर्ट' है क्या बला?

सरल भाषा में समझाएं तो यह "अदालतों का शॉपिंग मॉल" जैसा कांसेप्ट है। जी नहीं, वहां न्याय बिकेगा नहीं, बल्कि सुविधाएँ एक ही जगह मिलेंगी।
इसका मतलब है कि अब जज साहब का कमरा (कोर्ट रूम), वकीलों के बैठने की जगह, केस फाइल करने वाला काउंटर, बैंक, पोस्ट ऑफिस और कैंटीन—सब कुछ "एक ही छत के नीचे" होगा।

सोचिए, आपको एक कागज बनवाने के लिए अब भरी धूप में चार जगह नहीं दौड़ना पड़ेगा। आप बिल्डिंग में घुसे और अपना सारा काम निपटाकर ही बाहर निकले।

इन जिलों को मिली सौगात

जस्टिस सूर्यकांत ने इस प्रोजेक्ट की नींव रखते हुए महोबा, हाथरस, चंदौली, शामली जैसे जिलों (कुल 10 जिलों में योजना है, जिनमें पहले चरण में काम शुरू हो रहा है) के लोगों को बड़ी राहत दी है। उनका कहना था कि इंसाफ मांगना आसान होना चाहिए, सजा जैसा नहीं।

यह बदलाव न केवल वकीलों और जजों के लिए काम आसान करेगा, बल्कि उन हजारों गरीब और आम लोगों के लिए वरदान साबित होगा जो न्याय की आस में दिन भर भूखे-प्यासे कोर्ट परिसर में बैठे रहते थे। यूपी सरकार और न्यायपालिका का यह मिला-जुला प्रयास बताता है कि अब व्यवस्थाएं आधुनिक हो रही हैं।

तो उम्मीद कीजिए कि अगली बार जब कोई कोर्ट जाएगा, तो उसे धक्का-मुक्की नहीं, बल्कि सम्मान और सुविधा मिलेगी।