महंगाई की टेंशन होगी खत्म मिडिल ईस्ट में जंग के बीच वित्त मंत्री सीतारमण का बड़ा भरोसा, तेल की कीमतों पर दिया ये अपडेट

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News India Live, Digital Desk: मध्य पूर्व (West Asia) में ईरान और इजरायल के बीच छिड़े संघर्ष ने वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आग लगा दी है। ऐसे में भारतीय बाजार में महंगाई बढ़ने की आशंकाओं के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में देश को आश्वस्त किया है। उन्होंने साफ कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद भारत में महंगाई पर इसका 'बड़ा असर' होने की उम्मीद नहीं है।

कच्चे तेल में उछाल, पर भारत सुरक्षित क्यों?

सोमवार (9 मार्च, 2026) को लोकसभा में एक लिखित सवाल का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि फरवरी के अंत तक भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की कीमत $69.01 प्रति बैरल थी, जो मार्च की शुरुआत में बढ़कर $80.16 प्रति बैरल तक पहुंच गई है। उन्होंने तर्क दिया कि चूंकि भारत की वर्तमान खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation) अपने निचले स्तर पर है, इसलिए तेल की कीमतों में यह अस्थाई उछाल देश की अर्थव्यवस्था को पटरी से नहीं उतार पाएगा।

आंकड़ों की जुबानी: महंगाई का हाल

वित्त मंत्री ने सदन में कुछ महत्वपूर्ण आंकड़े पेश किए, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाते हैं:

रिटेल महंगाई में गिरावट: उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर जो 2023-24 में 5.4% थी, वह 2024-25 में घटकर 4.6% और जनवरी 2026 तक 2.75% के निचले स्तर पर आ गई है।

RBI का सुरक्षा चक्र: आरबीआई (RBI) के मानकों के अनुसार, अगर तेल की कीमतों में 10% की बढ़ोतरी होती है, तो महंगाई पर इसका असर मात्र 0.30% (30 बेसिस पॉइंट) तक ही पड़ने का अनुमान है।

सरकार के 'मास्टर स्ट्रोक' से मिलेगी राहत

वित्त मंत्री ने बताया कि सरकार केवल वैश्विक कीमतों के भरोसे नहीं है, बल्कि महंगाई रोकने के लिए कई प्रशासनिक कदम भी उठाए गए हैं:

बफर स्टॉक: दालों और प्याज जैसी आवश्यक खाद्य वस्तुओं का मजबूत बफर स्टॉक तैयार रखा गया है।

टैक्स में छूट: सालाना ₹12 लाख तक की आय वाले व्यक्तियों को आयकर से मुक्त कर जनता की 'डिस्पोजेबल इनकम' (हाथ में खर्च करने योग्य पैसा) बढ़ाई गई है।

ब्याज दरों में कटौती: फरवरी 2025 से अब तक नीतिगत दरों में 125 बेसिस पॉइंट की कटौती की जा चुकी है, जिससे कर्ज सस्ते हुए हैं।