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March 24 2026 04:01 am

Indira Ekadashi 2025 : पितरों को मोक्ष दिलाने वाली इंदिरा एकादशी, जानें सही तारीख, पूजा विधि और पारण का समय

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News India Live, Digital Desk:  हर एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है, लेकिन पितृपक्ष के दौरान आने वाली एकादशी का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की इस एकादशी को 'इंदिरा एकादशी' के नाम से जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से न सिर्फ भगवान विष्णु की कृपा मिलती है, बल्कि हमारे पूर्वजों की आत्मा को भी शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

इस व्रत के पुण्य प्रभाव से पितरों को यमलोक की यातनाओं से मुक्ति मिलती है और वे स्वर्गलोक में स्थान पाते हैं। चलिए, जानते हैं साल 2025 में इंदिरा एकादशी व्रत कब रखा जाएगा, पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है और इस व्रत का इतना महत्व क्यों है।

इंदिरा एकादशी 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त (Indira Ekadashi 2025: Date and Timings)

इस साल इंदिरा एकादशी की तिथि को लेकर कुछ भ्रम हो सकता है, लेकिन पंचांग के अनुसार सही तारीख जानना बहुत जरूरी है।

  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 17 सितंबर, 2025 को सुबह 12 बजकर 21 मिनट से।
  • एकादशी तिथि समाप्त: 17 सितंबर, 2025 को रात 11 बजकर 39 मिनट पर।
  • व्रत की तारीख: उदया तिथि के अनुसार, इंदिरा एकादशी का व्रत 17 सितंबर, 2025, दिन बुधवार को रखा जाएगा।
  • व्रत पारण का समय: व्रत का पारण अगले दिन यानी 18 सितंबर, 2025 को सुबह 06 बजकर 07 मिनट से सुबह 08 बजकर 34 मिनट के बीच किया जाएगा।

क्यों ख़ास है इंदिरा एकादशी व्रत?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति इंदिरा एकादशी का व्रत करता है, उसके पितरों को नरक लोक से मुक्ति मिलती है। इस व्रत को करने वाले व्यक्ति के सात पीढ़ियों तक के पितरों का उद्धार हो जाता है। यह व्रत न केवल पितरों को मोक्ष दिलाता है, बल्कि व्रत करने वाले के जीवन में भी सुख, शांति और समृद्धि लाता है

इंदिरा एकादशी की पूजा विधि (Puja Vidhi)

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • पूजा घर को साफ करें और भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
  • भगवान विष्णु को गंगाजल से स्नान कराएं और चंदन, अक्षत, फूल, तुलसी दल और फल अर्पित करें।
  • धूप-दीप जलाकर 'विष्णु सहस्रनाम' का पाठ करें या "ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें।
  • पूजा के बाद भगवान विष्णु की आरती करें।
  • इस दिन पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और ब्राह्मण को भोजन कराना बेहद पुण्यकारी माना जाता है।
  • शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे घी या तिल के तेल का दीपक जलाने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
  • अगले दिन यानी द्वादशी तिथि को शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण करें।