Indian Politics : क्या बिहार में खत्म होने वाला है जेपी युग? नीतीश कुमार के दिल्ली जाने की चर्चाओं का असली सच

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News India Live, Digital Desk: बिहार की राजनीति में पिछले कई दशकों से जयप्रकाश नारायण (जेपी) के शिष्यों का दबदबा रहा है। चाहे वो लालू प्रसाद यादव हों या नीतीश कुमार, इन नेताओं ने बिहार की सत्ता की धुरी को अपने इर्द-गिर्द घुमाया है। लेकिन अब खबर आ रही है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका निभाने के लिए दिल्ली का रुख कर सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो यह बिहार में 'समाजवाद' के उस खास अध्याय के समापन जैसा होगा जिसे 'जेपी आंदोलन' की उपज माना जाता है।

दिल्ली की दौड़ और बिहार की गद्दी: क्या है मास्टर प्लान?

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नीतीश कुमार को केंद्र में कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसके पीछे की रणनीति भाजपा और जेडीयू के बीच के आपसी तालमेल को और मजबूत करना बताया जा रहा है। नीतीश कुमार का दिल्ली जाना केवल एक नेता का स्थानांतरण नहीं है, बल्कि बिहार में सत्ता के नए केंद्र विकसित करने की एक सोची-समझी कोशिश है।

नई पीढ़ी के लिए रास्ता साफ?

अगर नीतीश कुमार बिहार की सक्रिय राजनीति से हटकर दिल्ली का रुख करते हैं, तो राज्य में नेतृत्व का एक बड़ा शून्य पैदा होगा। इसे भरने के लिए कई युवा चेहरे कतार में हैं। यह न केवल जेडीयू के लिए बल्कि भाजपा के लिए भी बिहार में अपना नया आधार तैयार करने का स्वर्णिम अवसर हो सकता है। जानकारों का मानना है कि इससे बिहार की राजनीति 'मंडल-कमंडल' के पुराने दौर से निकलकर 'विकास और नए विजन' की ओर बढ़ सकती है।

जेपी के शिष्यों का अंतिम दौर

लालू यादव स्वास्थ्य कारणों से सक्रिय राजनीति में पहले जैसे नजर नहीं आते, और अब नीतीश कुमार के दिल्ली जाने की खबरों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि 1974 के छात्र आंदोलन से निकले नेताओं का दौर अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। बिहार की जनता अब नए नेतृत्व और नई सोच की तलाश में है।