कर्नाटक में 56,000 सरकारी नौकरियों की बहार, लेकिन क्या बदल जाएगा आरक्षण का गणित

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News India Live, Digital Desk: कर्नाटक सरकार जल्द ही राज्य के विभिन्न विभागों में 56,000 रिक्त पदों को भरने की तैयारी कर रही है। लेकिन इस बड़ी भर्ती प्रक्रिया के शुरू होने से पहले ही राज्य में आरक्षण (Reservation) को लेकर राजनीति गर्मा गई है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली उच्च स्तरीय बैठकों के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या भर्ती के विज्ञापन जारी होने से पहले आरक्षण के कोटे में कोई बड़ा फेरबदल देखने को मिलेगा?

पंचमसाली लिंगायत और SC/ST आरक्षण पर टिकी निगाहें

राज्य में लंबे समय से पंचमसाली लिंगायत समुदाय खुद को 2A श्रेणी में शामिल करने की मांग कर रहा है। साथ ही, एससी/एसटी समुदायों के भीतर आंतरिक आरक्षण (Internal Reservation) को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद बहस तेज हो गई है। सरकार के सामने चुनौती यह है कि इन मांगों को पूरा किए बिना भर्ती शुरू की गई, तो उसे भारी विरोध का सामना करना पड़ सकता है।

भर्ती प्रक्रिया में देरी या नीतिगत बदलाव?

56,000 पदों पर भर्ती राज्य के युवाओं के लिए एक बड़ा अवसर है, लेकिन कानूनी अड़चनों से बचने के लिए सरकार आरक्षण की नीतियों को स्पष्ट कर लेना चाहती है। अगर भर्ती प्रक्रिया के बीच में नियमों में बदलाव होता है, तो पूरी प्रक्रिया अदालती कार्यवाही में फंस सकती है। इसीलिए, सरकार भर्ती का बिगुल फूंकने से पहले सभी समुदायों को साधने की कोशिश कर रही है।

क्या होगा युवाओं पर असर?

कर्नाटक के हजारों परीक्षार्थी पिछले काफी समय से इन नौकरियों का इंतजार कर रहे हैं। यदि सरकार आरक्षण के नए फार्मूले को लागू करती है, तो मेरिट लिस्ट और कट-ऑफ पर इसका सीधा असर पड़ेगा। फिलहाल, सरकार की बैठकों के दौर जारी हैं और जल्द ही इस पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण आने की उम्मीद है।