India US Defense : क्या भारत के सैन्य अड्डों का इस्तेमाल कर पाएगा अमेरिका? जानें लेमोआ LEMOA समझौते का पूरा सच और इसके मायने
News India Live, Digital Desk: भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रक्षा संबंधों ने पूरी दुनिया, विशेषकर पड़ोसी देशों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। हाल के दिनों में इस बात को लेकर काफी चर्चा हो रही है कि क्या अमेरिका युद्ध की स्थिति में भारत के सैन्य अड्डों का उपयोग कर सकता है? इस पूरी बहस के केंद्र में है 'LEMOA' (Logistics Exchange Memorandum of Agreement)। आइए जानते हैं कि यह समझौता असल में क्या है और भारत के लिए इसके क्या मायने हैं।
क्या है लेमोआ (LEMOA) और क्यों है यह इतना खास?
2016 में भारत और अमेरिका के बीच हुआ 'लेमोआ' एक लॉजिस्टिक समझौता है। सरल भाषा में कहें तो, यह दोनों देशों की सेनाओं को एक-दूसरे की सुविधाओं, जैसे—ईंधन भरने, मरम्मत करने और रसद (सप्लाई) के लिए अड्डों के उपयोग की अनुमति देता है। यह कोई सैन्य गठबंधन नहीं है, बल्कि एक तकनीकी सहयोग है जो समुद्री और हवाई अभियानों को आसान बनाता है।
क्या अमेरिकी सेना भारत से कर पाएगी हमला?
अक्सर यह गलतफहमी होती है कि इस समझौते के तहत अमेरिका भारत की धरती का उपयोग किसी अन्य देश पर हमला करने के लिए कर सकता है। हकीकत यह है कि LEMOA किसी भी देश को 'ऑपरेशनल बेस' प्रदान नहीं करता। इसका मतलब है कि अमेरिकी सेना भारत में अपना स्थायी बेस नहीं बना सकती और न ही यहाँ से सीधे युद्ध का संचालन कर सकती है। हर बार सुविधा का उपयोग करने के लिए भारत की अनुमति अनिवार्य होती है।
चीन और पाकिस्तान की बढ़ती चिंताएं
हिंद-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific) में चीन की बढ़ती दादागिरी को देखते हुए भारत और अमेरिका का यह तालमेल बेहद अहम माना जा रहा है। हालांकि, भारत ने हमेशा अपनी 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) को बनाए रखा है। लेमोआ के जरिए भारत को अमेरिकी तकनीक और रसद सहायता तो मिलती है, लेकिन भारत किसी भी अमेरिकी युद्ध का हिस्सा बनने के लिए बाध्य नहीं है।
भविष्य की रक्षा रणनीति और भारत का रुख
भारत अब केवल हथियारों का खरीदार नहीं रहना चाहता, बल्कि वह अमेरिका के साथ मिलकर सह-उत्पादन और सह-विकास पर जोर दे रहा है। लेमोआ जैसे समझौते भारत को एक 'ग्लोबल डिफेंस हब' के रूप में स्थापित करने में मदद कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय नौसेना की पहुंच दुनिया के सुदूर समुद्री कोनों तक हो जाएगी।