Pauranik Katha : कैसे हुआ स्वर्ग की सबसे सुंदर अप्सरा उर्वशी का जन्म? इंद्र का घमंड तोड़ने के लिए ऋषि ने किया था यह चमत्कार
News India Live, Digital Desk: हिंदू धर्मग्रंथों में उर्वशी को केवल एक नर्तकी नहीं, बल्कि सौंदर्य और शक्ति का प्रतीक माना गया है। उनके जन्म की कथा बद्रीनाथ धाम (बद्रिकाश्रम) से जुड़ी है, जहाँ भगवान विष्णु के दो स्वरूप नर और नारायण कठिन तपस्या कर रहे थे।
इंद्र का डर और कामदेव का षड्यंत्र
जब ऋषि नारायण घोर तपस्या में लीन थे, तब स्वर्ग के राजा इंद्र को अपने सिंहासन की चिंता सताने लगी। उन्हें लगा कि नारायण अपनी तपस्या के बल पर इंद्रपद छीनना चाहते हैं। इंद्र ने तपस्या भंग करने के लिए कामदेव, वसंत ऋतु और स्वर्ग की सबसे सुंदर अप्सराओं (रंभा, मेनका आदि) को पृथ्वी पर भेजा।
ऋषि नारायण का क्रोध नहीं, बल्कि 'सौंदर्य' से जवाब
अप्सराओं ने ऋषि नारायण के सामने नृत्य करना और उन्हें रिझाना शुरू किया। लेकिन ऋषि विचलित होने के बजाय मुस्कुराए। उन्होंने इंद्र का घमंड तोड़ने के लिए अपनी जांघ (ऊरु) को थपथपाया और वहां से एक ऐसी अत्यंत रूपवती स्त्री प्रकट हुई, जिसकी सुंदरता के आगे स्वर्ग की सभी अप्सराएं फीकी पड़ गईं। चूँकि वह ऋषि की 'ऊरु' (जांघ) से उत्पन्न हुई थीं, इसलिए उनका नाम 'उर्वशी' पड़ा।
स्वर्ग को मिला ऋषि का 'उपहार'
ऋषि नारायण ने उर्वशी को इंद्र को उपहार स्वरूप भेंट कर दिया। उर्वशी की सुंदरता देखकर कामदेव और अन्य अप्सराएं लज्जित हो गईं। उर्वशी बाद में इंद्रसभा की सबसे प्रमुख अप्सरा बनीं और उनकी सुंदरता के चर्चे तीनों लोकों में फैल गए।
उर्वशी और पुरूरवा की प्रेम कथा
उर्वशी का संबंध केवल स्वर्ग से नहीं रहा, बल्कि पृथ्वी के राजा पुरूरवा के साथ उनकी प्रेम कहानी और उनके विछोह की कथा कालिदास के प्रसिद्ध नाटक 'विक्रमोर्वशीयम्' का मुख्य आधार है। इसी वंश में आगे चलकर महान सम्राट भरत का जन्म हुआ, जिनके नाम पर हमारे देश का नाम 'भारत' पड़ा।