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March 18 2026 02:47 pm

Indian Parliament : कौन हैं मेनका गुरुस्वामी? भारत की पहली LGBTQ+ सांसद बन रचा इतिहास, जानें सुप्रीम कोर्ट की वकील से संसद तक का सफर

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News India Live, Digital Desk: भारत के संसदीय इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। सुप्रीम कोर्ट की प्रख्यात वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी (Menaka Guruswamy) देश की पहली ऐसी सांसद बन गई हैं, जो गर्व से LGBTQ+ समुदाय का प्रतिनिधित्व करती हैं। राज्यसभा के लिए उनके नामांकन और चयन ने न केवल कानूनी जगत बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी एक नई बहस छेड़ दी है।

सुप्रीम कोर्ट से संसद तक का सफर

मेनका गुरुस्वामी का नाम कानून की दुनिया में किसी परिचय का मोहताज नहीं है। वे भारत की उन चुनिंदा वकीलों में शामिल हैं, जिन्होंने हाशिए पर खड़े समुदायों की आवाज को उच्चतम स्तर पर उठाया है।

ऐतिहासिक जीत: उन्होंने धारा 377 (IPC Section 377) को खत्म करने की कानूनी लड़ाई में अहम भूमिका निभाई थी, जिसके बाद भारत में समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया।

शिक्षा: गुरुस्वामी ने नेशनल लॉ स्कूल, बैंगलोर से पढ़ाई की है और वे 'रोड्स स्कॉलर' (Rhodes Scholar) भी रही हैं। उनके पास ऑक्सफोर्ड और हार्वर्ड जैसी दुनिया की बेहतरीन यूनिवर्सिटीज की डिग्रियां हैं।

समावेशी राजनीति की ओर एक बड़ा कदम

मेनका गुरुस्वामी का सांसद बनना भारतीय लोकतंत्र की परिपक्वता को दर्शाता है। यह पहली बार है जब संसद के भीतर कोई सदस्य खुलकर अपनी लैंगिक पहचान (Gender Identity) के साथ देश की नीति निर्धारण प्रक्रिया का हिस्सा बनेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी उपस्थिति से संसद में मानवाधिकारों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर अधिक गहराई से चर्चा हो सकेगी।

समलैंगिक विवाह और अधिकारों की मुखर आवाज

गुरुस्वामी केवल कोर्ट रूम तक सीमित नहीं रही हैं। उन्होंने 'सेम सेक्स मैरिज' (Same-Sex Marriage) को कानूनी मान्यता दिलाने के लिए भी लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी है। अब सांसद के रूप में, उनके पास विधायी स्तर पर बदलाव लाने का मौका होगा। उन्होंने हमेशा तर्क दिया है कि संवैधानिक नैतिकता (Constitutional Morality) को सामाजिक नैतिकता से ऊपर रखा जाना चाहिए।

वैश्विक स्तर पर पहचान

साल 2019 में, प्रतिष्ठित 'टाइम मैगजीन' (TIME Magazine) ने मेनका गुरुस्वामी को दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों की सूची में शामिल किया था। वे कोलंबिया लॉ स्कूल में विजिटिंग प्रोफेसर भी रही हैं, जो उनके बौद्धिक कद को दर्शाता है।