India-Canada Relations : कनाडा की अपनी ही रिपोर्ट ने खोल दी पोल, खालिस्तानी आतंकियों की फंडिंग पर सबसे बड़ा खुलासा.
News India Live, Digital Desk: India-Canada Relations : भारत सालों से जो बात दुनिया के सामने चीख-चीख कर कह रहा था, अब उस पर खुद कनाडा की सरकार ने मुहर लगा दी है. कनाडा से ही एक बड़ी और चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें पहली बार खुलकर यह माना गया है कि खालिस्तानी उग्रवाद देश के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका है और इन आतंकी गुटों को कनाडा की धरती से ही पैसा और समर्थन मिल रहा है.
यह खुलासा कनाडा की एक संसदीय समिति की रिपोर्ट 'A Threat to Democracy: The Rise of Foreign Interference' में किया गया है. यह रिपोर्ट कनाडा की अपनी सुरक्षा और लोकतंत्र के लिए बढ़ते खतरों पर तैयार की गई है, और इसमें खालिस्तानी चरमपंथ को एक प्रमुख खतरे के रूप में शामिल किया गया है.
रिपोर्ट में क्या है सबसे बड़ा खुलासा?
इस रिपोर्ट में जो बात सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली है, वो है आतंकी फंडिंग को लेकर कनाडा का कबूलनामा. रिपोर्ट में साफ-साफ कहा गया है:
- खालिस्तानी उग्रवादी समूह कनाडा में रहकर पैसा इकट्ठा कर रहे हैं.
- इस पैसे का इस्तेमाल कनाडा और भारत, दोनों जगहों पर युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और उन्हें हिंसा के रास्ते पर धकेलने के लिए किया जा रहा है.
- यह फंडिंग खालिस्तानी एजेंडे को आगे बढ़ाने और भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने में मदद कर रही है.
आतंकी संगठनों के नाम भी शामिल
रिपोर्ट में बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) और सिख फॉर जस्टिस (SFJ) जैसे प्रतिबंधित आतंकी संगठनों का भी जिक्र है. इसमें बताया गया है कि कैसे ये संगठन कनाडा में बैठकर भारत के खिलाफ अपनी गतिविधियां चला रहे हैं. आपको बता दें कि बब्बर खालसा 1985 में एयर इंडिया की फ्लाइट में हुए बम धमाके के लिए जिम्मेदार है, जिसमें 329 लोगों की जान चली गई थी.
भारत के लिए क्यों है यह बड़ी जीत?
भारत लंबे समय से जस्टिन ट्रूडो सरकार से यह कहता आ रहा है कि कनाडा की धरती का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों और खालिस्तानी आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है. हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद दोनों देशों के रिश्तों में जो कड़वाहट आई थी, उसकी जड़ में भी यही मुद्दा था.
अब जब कनाडा की अपनी ही संसदीय समिति की रिपोर्ट ने इन बातों को सच मान लिया है, तो यह भारत के पक्ष की एक बड़ी जीत है. इस रिपोर्ट ने ट्रूडो सरकार पर भारी दबाव बना दिया है कि वह अब इन खालिस्तानी गुटों के खिलाफ सिर्फ बातें न करे, बल्कि ठोस कार्रवाई करके दिखाए.