India Bangladesh Trade : यह सिर्फ एक समझौता नहीं, एकतरफा खेल है अडानी-बांग्लादेश डील पर क्यों मचा है हंगामा?

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News India Live, Digital Desk: भारत और बांग्लादेश की दोस्ती की मिसालें अक्सर दी जाती हैं, लेकिन इस दोस्ती पर एक महंगा बिजली समझौता भारी पड़ता दिख रहा है। बांग्लादेश के एक जाने-माने थिंक टैंक ने अपनी एक रिपोर्ट में भारत के अडानी ग्रुप के साथ हुए बिजली खरीद समझौते पर गंभीर सवाल उठाए हैं, जिससे दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों में एक नई बहस छिड़ गई है।

इस रिपोर्ट में सीधा आरोप लगाया गया है कि अडानी पावर के साथ हुआ यह सौदा बांग्लादेश के लिए बेहद महंगा साबित हो रहा है और इसमें पारदर्शिता की भी भारी कमी है।

आखिर क्या है यह पूरा मामला?

यह विवाद भारत के झारखंड में स्थित अडानी ग्रुप के गोड्डा पावर प्लांट से जुड़ा है। इस प्लांट से 25 साल तक बांग्लादेश को बिजली सप्लाई करने का एक बड़ा समझौता हुआ है। लेकिन बांग्लादेश के थिंक टैंक 'सेंटर फॉर पॉलिसी डायलॉग' (CPD) ने अपनी जांच में पाया है कि इस डील में कई बड़ी गड़बड़ियां हैं।

रिपोर्ट के मुख्य आरोप:

  • एकतरफा समझौता: यह भी आरोप है कि समझौते की शर्तें काफी हद तक एकतरफा हैं, जिससे सिर्फ और सिर्फ कंपनी को ही फायदा हो रहा है, जबकि सारा जोखिम और घाटा बांग्लादेश सरकार का है।
  • पारदर्शिता पर सवाल: यह पूरी डील कैसे हुई और इसकी शर्तों को लेकर भी पारदर्शिता की कमी पर सवाल उठाए गए हैं।

पहले भी उठ चुके हैं सवाल

यह कोई पहली बार नहीं है जब यह बिजली समझौता विवादों में आया हो। इससे पहले 'वॉशिंगटन पोस्ट' जैसे दुनिया के बड़े अखबार भी अपनी रिपोर्ट में कोयले की कीमत को लेकर सवाल खड़े कर चुके हैं, जिसके आधार पर ही बिजली की दर तय होती है।

यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब बांग्लादेश खुद आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में, बिजली जैसी ज़रूरी चीज़ के लिए ज़्यादा कीमत चुकाना उसकी अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका है। इस रिपोर्ट ने दोस्ती और व्यापार के बीच की महीन रेखा को लेकर एक बड़ी बहस खड़ी कर दी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि बांग्लादेश सरकार और अडानी ग्रुप इन गंभीर आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं