इनकम टैक्स रिफंड में हो रही है देरी? कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये 6 गलतियां
News India Live, Digital Desk : नया साल 2026 शुरू हो चुका है और इसी के साथ बहुत से लोग अपना टैक्स रिफंड आने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। सरकार ने वैसे तो रिफंड की प्रक्रिया को काफी तेज कर दिया है, लेकिन फिर भी लाखों रिफंड सिर्फ इसलिए अटक जाते हैं क्योंकि फॉर्म भरते समय हम कुछ बारीक चीजें मिस कर देते हैं। अगर आप चाहते हैं कि आपका पैसा बिना किसी रुकावट के सीधे खाते में आए, तो इन 6 बातों को अभी जांच लें:
1. बैंक अकाउंट का 'प्री-वैलिडेशन' न होना
यह सबसे आम गलती है। टैक्स विभाग आपका रिफंड उसी खाते में भेजता है जिसे आपने इनकम टैक्स पोर्टल पर 'प्री-वैलिडेट' (Pre-validate) किया हुआ है। अगर आपने हाल ही में बैंक बदला है या आपका पुराना अकाउंट बंद हो गया है, तो रिफंड फेल हो जाएगा। अपना IFSC कोड और अकाउंट नंबर एक बार दोबारा चेक करें।
2. ई-वेरिफिकेशन (E-verification) को भूल जाना
आपने रिटर्न फाइल तो कर दिया, लेकिन क्या उसे 'वेरिफाई' किया? याद रखिए, जब तक आप अपने ITR को ई-वेरिफाई नहीं करते, उसे 'सबमिट' नहीं माना जाता। फाइलिंग के बाद आपके पास इसे वेरिफाई करने के लिए सीमित समय होता है। अगर यह पेंडिंग है, तो रिफंड के बारे में सोचना भी बेकार है।
3. PAN और आधार का आपस में लिंक न होना
साल 2026 में यह नियम और भी कड़ा हो गया है। अगर आपका पैन कार्ड आपके आधार कार्ड से लिंक नहीं है, तो विभाग आपका रिटर्न प्रोसेस ही नहीं करेगा। अगर प्रक्रिया अटक गई है, तो एक बार इसकी जांच जरूर करें कि दोनों डॉक्युमेंट्स आपस में अपडेटेड हैं या नहीं।
4. गलत ITR फॉर्म का चुनाव
इनकम टैक्स विभाग अलग-अलग आय के स्रोतों के लिए अलग-अलग फॉर्म (ITR-1, ITR-2 आदि) देता है। अगर आप नौकरीपेशा हैं और आपने गलती से बिजनेस वाला फॉर्म भर दिया, तो आपका रिफंड रुक जाएगा और विभाग की ओर से आपको 'डिफेक्टिव रिटर्न' का नोटिस भी आ सकता है।
5. डेटा में बेमेल जानकारी (Data Mismatch)
आप जो रिफंड क्लेम कर रहे हैं, वो आपके 26AS और AIS (Annual Information Statement) के डेटा से मेल खाना चाहिए। अगर आपके टीडीएस (TDS) काटने वाली कंपनी ने जानकारी अलग भरी है और आपने कुछ और, तो रिफंड तब तक नहीं आएगा जब तक ये जानकारी एक जैसी नहीं हो जाती।
6. गलत या संदिग्ध टैक्स छूट (Deductions) का दावा
अगर आप बहुत ज्यादा टैक्स बचाने के चक्कर में ऐसी छूट का दावा करते हैं जिनके लिए आपके पास पक्के सबूत नहीं हैं, तो सिस्टम इसे 'रेड फ्लैग' कर देता है। ऐसे मामलों में रिफंड रोक दिया जाता है और अतिरिक्त जांच के बाद ही पैसा जारी किया जाता है।