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April 03 2026 12:23 am

सावधान! 'जवां' दिखने की चाहत में कहीं लिवर न हो जाए डैमेज, सोशल मीडिया के चक्कर में 42 साल के शख्स ने खुद को पहुंचाया अस्पताल

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आज के दौर में सोशल मीडिया पर सेहत से जुड़े नुस्खों की बाढ़ आई हुई है, लेकिन बिना डॉक्टरी सलाह के इन्हें आजमाना जानलेवा साबित हो सकता है। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल से सामने आया है। अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. चटर्जी ने विटामिन B3 (नायसिन) के ओवरडोज का एक ऐसा मामला बताया है, जिसने एक स्वस्थ व्यक्ति को मौत के मुहाने पर खड़ा कर दिया।

केस स्टडी: 'एंटी-एजिंग' के चक्कर में डैमेज होने लगा लिवर

मामला एक 42 वर्षीय व्यक्ति का है, जिसने इंटरनेट पर पढ़ा कि विटामिन B3 (Niacin) कोलेस्ट्रॉल कम करने और लंबी उम्र (Longevity) पाने में मदद करता है। इस 'जादुई गोली' के लालच में उसने बिना किसी डॉक्टर से पूछे इसका हाई-डोज लेना शुरू कर दिया। मात्र दो हफ्तों के भीतर उसकी स्थिति इतनी बिगड़ गई कि उसे अस्पताल भागना पड़ा। उसे त्वचा पर लाल चकत्ते, असहनीय खुजली, मतली, पेट दर्द और भारी थकान महसूस हो रही थी। जांच में पता चला कि उसके लिवर एंजाइम और ब्लड शुगर का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ चुका था और उसका लिवर फेल होने की कगार पर था।

क्या है विटामिन B3 और शरीर के लिए इसकी भूमिका?

विटामिन B3 एक पानी में घुलनशील (Water-soluble) विटामिन है, जो शरीर के लिए बेहद जरूरी है। यह भोजन को ऊर्जा में बदलने, कोशिकाओं के DNA रिपेयर करने और नर्वस सिस्टम को ठीक रखने में मदद करता है। यह शरीर में NAD+ नाम के मॉलिक्यूल का आधार है, जो सेल्स को जवान रखने और तनाव से लड़ने की शक्ति देता है।

सच या मिथक: क्या वाकई बढ़ती उम्र को रोकता है नायसिन?

आजकल नायसिन को 'एंटी-एजिंग' सप्लीमेंट के रूप में जमकर प्रमोट किया जा रहा है। हालांकि जानवरों पर हुए शोध में इसके कुछ सकारात्मक संकेत मिले हैं, लेकिन इंसानों पर ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है कि ये सप्लीमेंट्स उम्र बढ़ा सकते हैं। डॉ. चटर्जी के अनुसार, उम्र बढ़ना एक जटिल प्रक्रिया है जिसे केवल एक गोली से नहीं रोका जा सकता। बिना जरूरत के इसे लेना 'अमृत' के बजाय 'जहर' का काम कर सकता है।

ओवरडोज के भयानक साइड इफेक्ट्स

विटामिन B3 की दैनिक आवश्यकता केवल 14-16 मिलीग्राम (mg) होती है, जबकि बाजार में मिलने वाले सप्लीमेंट्स में यह 500 से 3000 मिलीग्राम तक होता है। इतनी भारी मात्रा में सेवन करने से निम्नलिखित खतरे हो सकते हैं:

लिवर टॉक्सिसिटी: अत्यधिक मात्रा में लेने पर लिवर इसे प्रोसेस नहीं कर पाता और डैमेज होने लगता है।

स्किन फ्लशिंग: त्वचा का लाल होना और तेज खुजली।

मेटाबॉलिक रिस्क: ब्लड शुगर का अचानक बढ़ जाना और इंसुलिन रेजिस्टेंस।

दिल को खतरा: कुछ शोधों के अनुसार, इसका अधिक सेवन दिल की नसों में सूजन पैदा कर सकता है।

किसे है सप्लीमेंट की जरूरत?

डॉक्टरों का मानना है कि संतुलित आहार लेने वाले 90% लोगों को किसी अतिरिक्त सप्लीमेंट की जरूरत नहीं होती। मूंगफली, साबुत अनाज, मांस, मछली और डेयरी उत्पादों से इसकी कमी आसानी से पूरी हो जाती है। सप्लीमेंट केवल तब लें जब डॉक्टर ने आपको किसी विशेष बीमारी (जैसे पेलाग्रा) के लिए इसे प्रिस्क्राइब किया हो।