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April 09 2026 10:26 am

गर्मी में भी फूलों से लद जाएगी अपराजिता की बेल बस अपनाएं ये 5 सीक्रेट टिप्स

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News India Live, Digital Desk: नीले और सफेद फूलों वाली अपराजिता, जिसे 'विष्णुप्रिया' और 'शंखपुष्पी' भी कहा जाता है, न केवल दिखने में सुंदर है बल्कि धार्मिक और औषधीय रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। लेकिन जैसे ही पारा 40 डिग्री के पार जाता है, इस पौधे की पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और फूल आना बंद हो जाते हैं। अगर आपकी अपराजिता की बेल भी सूख रही है या उसमें फूल नहीं आ रहे, तो घबराएं नहीं। कुछ आसान घरेलू उपायों और सही देखभाल से आप भीषण गर्मी में भी अपने बागीचे को इन नीले फूलों से महका सकते हैं।

1. पिंचिंग और प्रूनिंग: नई शाखाओं का 'मंत्र'

अपराजिता में जितने ज्यादा शाखाएं होंगी, उतने ही ज्यादा फूल आएंगे। इसके लिए 'पिंचिंग' (Pinching) सबसे कारगर तरीका है। पौधे की ऊपरी टहनियों के सिरों को उंगलियों से तोड़ दें। इससे पौधा ऊपर बढ़ने के बजाय साइड से नई शाखाएं निकालेगा। साथ ही, सूखी हुई टहनियों की हल्की छंटाई (Pruning) करते रहें ताकि पौधे की ऊर्जा नई कलियां बनाने में लगे।

2. 'एप्सम साल्ट' का जादू: पत्तियां रहेंगी हमेशा हरी

गर्मियों में अक्सर मैग्नीशियम की कमी से अपराजिता की पत्तियां पीली होने लगती हैं। महीने में एक बार एक चम्मच एप्सम साल्ट (Epsom Salt) को एक लीटर पानी में घोलकर पौधे की जड़ों में डालें और पत्तियों पर स्प्रे करें। इससे क्लोरोफिल बढ़ता है और पौधा भीषण धूप को सहने की शक्ति पाता है।

3. 'डेडहेडिंग' है जरूरी: बीज न बनने दें

अपराजिता के फूलों के सूखने के बाद उनमें मटर जैसी फलियां (बीज) बनने लगती हैं। अगर आप इन बीजों को नहीं हटाते, तो पौधा अपनी पूरी ताकत बीज बनाने में लगा देता है और फूल देना बंद कर देता है। इसलिए, जैसे ही फूल सूखे, उसे तुरंत हटा दें। इस प्रक्रिया को 'डेडहेडिंग' कहते हैं, जिससे पौधा लगातार नई कलियां बनाता रहता है।

4. होममेड फर्टिलाइजर: किचन वेस्ट से आएगा निखार

केले के छिलकों का पानी अपराजिता के लिए 'अमृत' समान है। केले के छिलकों को 2-3 दिन पानी में भिगोकर रखें और फिर उस पानी को छानकर पौधे में डालें। इसमें मौजूद पोटेशियम फूलों की संख्या बढ़ाने में मदद करता है। इसके अलावा, इस्तेमाल की हुई चाय पत्ती (धोकर सुखाकर) मिट्टी में मिलाने से नाइट्रोजन की कमी दूर होती है।

5. सही धूप और पानी का संतुलन

अपराजिता को धूप पसंद है, लेकिन दोपहर की झुलसाने वाली लू से इसे बचाना जरूरी है। कोशिश करें कि इसे ऐसी जगह रखें जहाँ सुबह की 4-5 घंटे की धूप मिले। पानी हमेशा सुबह या शाम को ही दें। दोपहर में पानी देने से जड़ें 'शॉक' में जा सकती हैं। गमले की मिट्टी में नमी बनाए रखने के लिए 'मल्चिंग' (सूखी पत्तियों या नारियल के छिलकों से मिट्टी को ढंकना) का सहारा लें।