PPF खाते से चाहते हैं सबसे ज्यादा ब्याज? तो जान लें महीने की '5 तारीख' का यह सीक्रेट नियम

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पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF)... यह नाम सुनते ही हमारे दिमाग में एक सुरक्षित, टैक्स-फ्री और गारंटीड रिटर्न वाले निवेश की तस्वीर उभरती है। यह भारत के सबसे लोकप्रिय और भरोसेमंद लॉन्ग-टर्म सेविंग स्कीम्स में से एक हैं, खासकर उन लोगों के लिए जो अपने रिटायरमेंट, बच्चों की पढ़ाई या किसी बड़े लक्ष्य के लिए पैसा जमा करना चाहते हैं। सरकार द्वारा समर्थित होने के कारण इसमें पैसा डूबने का कोई खतरा नहीं होता, और इसका ब्याज, मैच्योरिटी और यहां तक कि निवेश भी पूरी तरह से टैक्स-फ्री (EEE-Exempt-Exempt-Exempt) होता हैं।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि PPF में पैसा जमा करने के समय में सिर्फ कुछ दिनों का हेरफेर करके आप अपने फाइनल रिटर्न में हजारों, और लंबी अवधि में लाखों रुपये का अतिरिक्त फायदा कमा सकते हैं? जी हां, इसका सारा राज छिपा हैं हर महीने की 5 तारीख में। 90% से ज़्यादा PPF खाताधारक इस छोटे लेकिन बेहद महत्वपूर्ण नियम के बारे में नहीं जानते और हर साल मिलने वाले अतिरिक्त ब्याज से चूक जाते हैं।

तो चलिए, आज PPF के इसी '5 तारीख वाले नियम' के रहस्य से पर्दा उठाते हैं, जिसे जानकर आप भी अपनी मेहनत की कमाई पर सबसे ज़्यादा रिटर्न पा सकते हैं।

 

PPF में ब्याज की गणना कैसे होती है? (The Calculation Secret)

इस नियम को समझने के लिए, सबसे पहले यह जानना ज़रूरी है कि PPF खाते में ब्याज की गणना आखिर होती कैसे है।

  • ब्याज दर: PPF पर ब्याज दर सरकार द्वारा हर तिमाही (every quarter) में तय की जाती ਹੈ।
  • मासिक गणना, वार्षिक क्रेडिट: हालांकि ब्याज आपके खाते में हर साल 31 मार्च को क्रेडिट किया जाता है, लेकिन इसकी गणना हर महीने की जाती है।
  • सबसे महत्वपूर्ण नियम: PPF में ब्याज की गणनामहीने की 5 तारीख से लेकर महीने की आखिरी तारीख के बीच मौजूद न्यूनतम बैलेंस (Minimum Balance) पर की जाती है।

 

क्या है यह जादुई '5 तारीख का नियम'? (The 5th of the Month Rule)

अब आता ਹੈ खेल का असली हिस्सा। जैसा कि ऊपर बताया गया है, ब्याज की गणना महीने की 5 तारीख से महीने के अंत तक के सबसे कम बैलेंस पर होती हैं।

इसका सीधा सा मतलब यह है कि अगर आप अपने PPF खाते में महीने की 5 तारीख के बाद पैसा जमा करते हैं, तो उस महीने के लिए आपको उस जमा की गई राशि पर कोई भी ब्याज नहीं मिलेगा। उस पैसे पर ब्याज की गणना अगले महीने की 5 तारीख से शुरू होगी।

चलिए एक उदाहरण से समझते हैं:

मान लीजिए, आपके PPF खाते में 30 अप्रैल को 1,00,000 रुपये थे। अब मई महीने के लिए दो स्थितियां हो सकती हैं:

केस 1: आपने ₹50,000 महीने की 6 तारीख को जमा किए

  • 1 मई से 5 मई तक आपका बैलेंस: ₹1,00,000
  • 6 मई को जमा: ₹50,000
  • 6 मई से 31 मई तक आपका बैलेंस: ₹1,50,000
  • गणना के लिए न्यूनतम बैलेंस: अब, जब मई महीने के ब्याज की गणना होगी, तो सिस्टम 5 मई से 31 मई के बीच का सबसे कम बैलेंस देखेगा, जो कि ₹1,00,000 ही था (क्योंकि ₹50,000 तो 5 तारीख के बाद जमा हुए)।
  • नतीजा: आपको मई महीने के लिए सिर्फ 1 लाख रुपये पर ही ब्याज मिलेगा। आपके जमा किए गए 50 हजार रुपये पर आपको एक महीने का ब्याज नहीं मिलेगा।

केस 2: आपने ₹50,000 महीने की 5 तारीख को (या उससे पहले) जमा किए

  • 1 मई से 4 मई तक आपका बैलेंस: ₹1,00,000
  • 5 मई को जमा: ₹50,000
  • 5 मई से 31 मई तक आपका बैलेंस: ₹1,50,000
  • गणना के लिए न्यूनतम बैलेंस: अब, जब मई महीने के ब्याज की गणना होगी, तो सिस्टम 5 मई से 31 मई के बीच का सबसे कम बैलेंस देखेगा, जो कि ₹1,50,000 है।
  • नतीजा: आपको मई महीने के लिए पूरे 1.5 लाख रुपये पर ब्याज मिलेगा!

लंबी अवधि में कितना बड़ा फर्क पड़ता है?

आपको लग सकता हैं कि एक महीने के ब्याज से क्या ही फर्क पड़ेगा। लेकिन याद रखें, PPF एक लंबी अवधि का निवेश है और यहां 'चक्रवृद्धि ब्याज' यानी कंपाउंडिंग (Compounding) का जादू काम करता है।

  • छोटी-छोटी रकम जो आप हर महीने अतिरिक्त ब्याज के रूप में कमाते हैं उस पर भी आगे चलकर आपको ब्याज मिलता है।
  • 15 या 20 साल की अवधि में, सिर्फ इस एक आदत को अपनाने से आपके फाइनल फंड में लाखों रुपये का अंतर आ सकता है।

क्या है आपके लिए स्मार्ट एक्शन प्लान?

अगर आप अपने PPF निवेश से अधिकतम लाभ उठाना चाहते हैं, तो इन गोल्डन रूल्स को हमेशा याद रखें:

  1. 5 तारीख की डेडलाइन: हमेशा यह नियम बना लें कि आपको अपने PPF खाते में पैसा हर महीने की 1 से 5 तारीख के बीच ही जमा करना है। अगर आप मासिक निवेश करते हैं, तो अपनी SIP या स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शन की तारीख 5 से पहले की सेट करें।
  2. साल की शुरुआत में करें निवेश: अगर आप साल में एक बार एकमुश्त (lump sum) राशि जमा करते हैं, तो उसे साल के अंत (मार्च) में जमा करने के बजाय, नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत में ही 1 अप्रैल से 5 अप्रैल के बीच जमा कर दें। ऐसा करने से आपको उस पूरी राशि पर पूरे 12 महीनों का ब्याज मिलेगा।

यह एक छोटा सा अनुशासन है, लेकिन यह आपके भविष्य के लिए एक बहुत बड़ा और फायदेमंद कदम साबित होगा।

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