बिहार के 1 करोड़ बच्चों के हाथ में मोबाइल सिम 5 साल में 5 गुना बढ़ा आंकड़ा पढ़ाई या लत?
News India Live, Digital Desk : बिहार की नई पीढ़ी तेजी से डिजिटल दुनिया की गिरफ्त में आ रही है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में 9 से 17 वर्ष के बच्चों के पास मोबाइल सिम की संख्या 1 करोड़ (10 Million) के पार पहुँच गई है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि पिछले महज 5 वर्षों में इस आंकड़े में 5 गुना की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह बदलाव बिहार के बदलते सामाजिक और तकनीकी परिदृश्य की एक बड़ी तस्वीर पेश करता है।
रिपोर्ट के चौंकाने वाले खुलासे: क्यों बढ़ी सिम की संख्या?
डाटा के विश्लेषण से पता चलता है कि बच्चों के पास मोबाइल और सिम पहुँचने के पीछे कई प्रमुख कारण हैं:
ऑनलाइन पढ़ाई का असर: कोरोना काल के बाद से डिजिटल एजुकेशन और कोचिंग ऐप्स के इस्तेमाल के लिए माता-पिता ने बच्चों को मोबाइल उपलब्ध कराए।
सस्ता डेटा और स्मार्टफोन: बाजार में सस्ते एंड्रॉइड फोन और किफायती इंटरनेट प्लान ने इसे ग्रामीण इलाकों के बच्चों तक भी पहुँचा दिया है।
सोशल मीडिया और रील्स: यूट्यूब, इंस्टाग्राम और गेमिंग (जैसे फ्री फायर/बीजीएमआई) के प्रति बढ़ता आकर्षण बच्चों में अलग सिम कार्ड रखने की बड़ी वजह है।
5 साल में कैसे बदला परिदृश्य? (तुलनात्मक चार्ट)
| वर्ष | बच्चों के पास सक्रिय सिम (अनुमानित) |
|---|---|
| 2021 | लगभग 20 लाख |
| 2026 | 1 करोड़ से अधिक |
विशेषज्ञों की चिंता: वरदान या अभिशाप?
इस रिपोर्ट ने मनोवैज्ञानिकों और अभिभावकों के बीच बहस छेड़ दी है:
साइबर सुरक्षा: कम उम्र में इंटरनेट के असुरक्षित उपयोग से बच्चे साइबर फ्रॉड और आपत्तिजनक कंटेंट का शिकार हो रहे हैं।
सेहत पर प्रभाव: स्क्रीन टाइम बढ़ने से बच्चों की आंखों, नींद और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।
एकाग्रता में कमी: पढ़ाई के लिए लिए गए मोबाइल का इस्तेमाल अब रील बनाने और गेम खेलने में अधिक हो रहा है।