करवा चौथ पर चाँद न दिखे तो व्रत कैसे खोलें? घबराएं नहीं, पहले जान लें ये आसान उपाय!
करवा चौथ, पति-पत्नी के प्यार और विश्वास का सबसे बड़ा त्योहार. इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए दिन भर निर्जला व्रत रखती हैं और रात को चाँद देखकर ही अपना व्रत खोलती हैं. दिन तो पूजा-पाठ और तैयारियों में निकल जाता है, लेकिन असली परीक्षा शाम को शुरू होती है, जब नज़रें आसमान में चाँद को ढूंढने लगती हैं.
लेकिन सोचिए, अगर मौसम खराब हो, आसमान में घने बादल छाए हों और चाँद के दर्शन ही न हों, तब क्या होगा? यह एक ऐसा सवाल है जो हर साल कई महिलाओं के मन में चिंता पैदा करता है. अगर आपके साथ भी कभी ऐसा हो, तो घबराने की बिल्कुल ज़रूरत नहीं है. हमारे शास्त्रों में ऐसी हर स्थिति के लिए आसान उपाय बताए गए हैं.
सबसे पहले जान लीजिए, 2025 में करवा चौथ कब है?
अगले साल यानी 2025 में करवा चौथ का व्रत 18 अक्टूबर, शनिवार को रखा जाएगा. इस दिन चाँद निकलने (चंद्रोदय) का अनुमानित समय रात 08:16 बजे के करीब है.
जब चाँद न दिखे, तो ये उपाय आएंगे काम
अगर किसी भी वजह से आपको चाँद के दर्शन नहीं हो पाते हैं, तो आप इन उपायों को अपनाकर अपना व्रत और पूजा पूरी कर सकती हैं:
- चाँद निकलने की दिशा में दें अर्घ्य: अपने घर के बड़े-बुजुर्गों से पूछें कि आपके शहर में चाँद किस दिशा में निकलता है. आप उसी दिशा की ओर मुँह करके, मन में चंद्र देव का ध्यान करें. पूरी श्रद्धा से उनकी पूजा करें, आरती करें और उसी दिशा में अर्घ्य देकर अपना व्रत खोल सकती हैं.
- भगवान शिव की शरण में जाएं: भगवान शिव अपने मस्तक पर चंद्रमा को धारण करते हैं, इसीलिए उन्हें 'चंद्रशेखर' भी कहा जाता है. आप भगवान शिव की ऐसी कोई तस्वीर या मूर्ति की पूजा कर सकती हैं, जिसमें उनके माथे पर चाँद बना हो. उस चाँद को देखकर पूजा करने से भी आपका व्रत सफल माना जाता है.
- थाली में बनाएं चावल का चाँद: एक साफ थाली या चौकी पर, थोड़े से चावल से एक गोलाकार चाँद की आकृति बनाएं. इसे चंद्र देव का प्रतीक मानकर, पूरी विधि-विधान से इसकी पूजा करें. आरती करने के बाद इसी को अर्घ्य दें और व्रत का पारण करें.
- पति को देखकर खोलें व्रत: करवा चौथ का व्रत पति के लिए ही रखा जाता है. ऐसे में अगर चाँद नहीं दिखता, तो आप अपने पति को ईश्वर का स्वरूप मानकर उन्हें देख सकती हैं और फिर उनके हाथ से पानी पीकर अपना व्रत पूरा कर सकती हैं.
याद रखिए, ईश्वर हमेशा आपकी भावना और श्रद्धा को देखता है, सिर्फ rituals को नहीं. सच्चे मन से किया गया आपका व्रत हर हाल में स्वीकार होता है.