कुर्सी गई तो जाने दो, राम का काम नहीं रुकना चाहिए, योगी ने याद दिलाया कल्याण सिंह का वो महान त्याग

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News India Live, Digital Desk : आज यानी 5 जनवरी का दिन उत्तर प्रदेश की राजनीति और राम भक्तों के लिए बेहद खास है। आज 'हिंदू हृदय सम्राट' कहे जाने वाले और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कल्याण सिंह (बाबूजी) की जयंती है। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और कुछ ऐसा कहा जिसे सुनकर हर राम भक्त का सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा।

हम अक्सर नेताओं को कुर्सी के लिए लड़ते देखते हैं, लेकिन सीएम योगी ने आज याद दिलाया कि कल्याण सिंह एक ऐसे नेता थे जिन्होंने कुर्सी को पैरों की जूती समझा था।

सत्ता नहीं, संकल्प को चुना
लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी थोड़े भावुक नजर आए। उन्होंने कहा, "जब बाबूजी के सामने दो रास्ते थे— एक तरफ सत्ता (मुख्यमंत्री की कुर्सी) और दूसरी तरफ संकल्प (राम मंदिर का वादा), तो उन्होंने एक पल की भी देर नहीं लगाई। उन्होंने संकल्प को चुना और सत्ता को त्याग दिया।"

योगी जी का इशारा 6 दिसंबर 1992 की घटना की तरफ था। उस वक्त कल्याण सिंह पर बहुत दबाव था कि कारसेवकों पर गोली चलवाएं, सख्ती बरतें। लेकिन बाबूजी ने साफ कह दिया था कि "मैं रामभक्तों पर गोली नहीं चलाऊंगा, भले ही मेरी सरकार बर्खास्त कर दी जाए।" और वही हुआ, उनकी सरकार चली गई, लेकिन वे इतिहास में अमर हो गए।

राम काज के लिए बने थे कल्याण सिंह
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बाबूजी का जीवन सिर्फ राजनीति नहीं था, वो एक मिशन था। आज अगर अयोध्या में भव्य राम मंदिर खड़ा है, तो इसकी नींव में कहीं न कहीं कल्याण सिंह का वो त्याग भी शामिल है। उन्होंने अपने वनवास (राजनीतिक संघर्ष) को स्वीकार किया लेकिन अपने उसूलों से समझौता नहीं किया।

सुशासन के वो भी थे प्रतीक
सिर्फ राम मंदिर ही नहीं, योगी ने याद दिलाया कि कैसे कल्याण सिंह ने यूपी में नकल माफियाओं की कमर तोड़ी थी और सुशासन (Good Governance) का पाठ पढ़ाया था। 90 के दशक में अपराधी उनके नाम से थर-थर कांपते थे।

सीएम योगी ने कहा कि आज की पीढ़ी को बाबूजी के जीवन से सीखना चाहिए कि पद बड़ा नहीं होता, प्रतिष्ठा और 'त्याग' बड़ा होता है। “जब तक राम मंदिर रहेगा, कल्याण सिंह का नाम हर ईंट में गूंजेगा।”