Crude Oil Price: ट्रंप की भविष्यवाणी से गिरा कच्चे तेल का दाम, $120 से फिसलकर वापस $90 के नीचे आया क्रूड

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नई दिल्ली, ब्यूरो।दुनिया भर में गहराते युद्ध के बादलों और आसमान छूती तेल की कीमतों के बीच मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़ी राहत देखने को मिली है। एक दिन पहले जो कच्चा तेल 120 डॉलर प्रति बैरल के खतरनाक स्तर पर पहुँच गया था, वह आज लुढ़क कर 90 डॉलर के नीचे आ गया है। इस नाटकीय गिरावट के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह बयान है, जिसमें उन्होंने दावा किया कि मिडिल ईस्ट में जारी ईरान-इजराइल युद्ध अब अपने अंतिम चरण में है और बहुत जल्द खत्म होने वाला है।

ट्रंप की भविष्यवाणी और पुतिन का प्रपोजल: बाजार में लौटी शांति

मंगलवार सुबह ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) के दाम में 6.6% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई और यह $92.45 प्रति बैरल पर आ गया। वहीं, अमेरिकी तेल WTI भी करीब 6.5% गिरकर $88.65 पर आ गया।

ट्रंप का दावा: ट्रंप ने सीबीएस न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा कि ईरान के खिलाफ युद्ध "लगभग पूरा हो चुका है" और अमेरिका अपने शुरुआती अनुमानित समय से काफी आगे चल रहा है।

पुतिन की भूमिका: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी ट्रंप से बात की और युद्ध को जल्दी सुलझाने के लिए कुछ प्रपोजल साझा किए हैं। इन खबरों से वैश्विक तेल सप्लाई में लंबे समय तक होने वाली रुकावटों का डर कम हो गया है।

$120 तक पहुँचा था पारा: सऊदी अरब और इराक ने घटाया था प्रोडक्शन

सोमवार को बाजार में उस वक्त हाहाकार मच गया था जब ब्रेंट क्रूड $119.50 के स्तर को छू गया। यह 2022 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर था। इसकी मुख्य वजह थी सप्लाई में भारी कटौती:

इराक: इराक ने अपने दक्षिणी तेल क्षेत्रों में उत्पादन 70% घटाकर केवल 1.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन कर दिया।

सऊदी अरब: सऊदी अरब और कुवैत ने भी सप्लाई में कटौती शुरू कर दी थी।

होरमुज़ की खाड़ी: ईरान ने धमकी दी है कि अगर अमेरिकी हमले जारी रहे, तो वह खाड़ी से "एक लीटर तेल" भी एक्सपोर्ट नहीं होने देगा। हालांकि, ट्रंप के ताजा रुख के बाद इन धमकियों का असर बेअसर साबित हुआ।

ट्रंप का 'प्लान-B': रूस पर से बैन हटाने और इमरजेंसी स्टॉक रिलीज करने की तैयारी

सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन तेल की कीमतों को काबू में रखने के लिए कई बड़े विकल्पों पर विचार कर रहा है:

रूस पर नरमी: अमेरिका रूस पर लगे तेल प्रतिबंधों (Oil Sanctions) को कम करने पर विचार कर रहा है ताकि वैश्विक बाजार में तेल की आवक बढ़ सके।

इमरजेंसी रिजर्व: अमेरिका अपने रणनीतिक तेल भंडार (SPR) से भारी मात्रा में क्रूड रिलीज कर सकता है।

G7 का साथ: G7 देशों ने भी संकेत दिया है कि वे बाजार को स्थिर करने के लिए जरूरी कदम उठाने के लिए तैयार हैं।

विश्लेषकों की राय: उतार-चढ़ाव अभी जारी रहेगा

मार्केट एनालिस्ट टोनी साइकामोर के अनुसार, आने वाले कुछ दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में भारी अस्थिरता देखी जा सकती है। बाजार की रेंज $75 से $105 के बीच रहने की संभावना है। फिलहाल, भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए यह गिरावट एक बड़ी राहत की खबर है, क्योंकि इससे घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने का खतरा फिलहाल टल गया है।