Patna High Court : थाने में गुंडागर्दी पड़ी भारी, 4 लोगों को अवैध हिरासत में रखा तो हाईकोर्ट ने पुलिसवालों पर ही ठोक दिया जुर्माना
News India Live, Digital Desk: Patna High Court : पटना हाई कोर्ट ने पुलिस की मनमानी पर एक जोरदार तमाचा जड़ते हुए एक ऐसा फैसला सुनाया जो हर उस पुलिसवाले के लिए एक सबक है जो कानून को अपनी जागीर समझता है. हाई कोर्ट ने चार लोगों को अवैध रूप से थाने में हिरासत में रखने के मामले में न सिर्फ कड़ी नाराजगी जताई, बल्कि दोषी पुलिसकर्मियों पर जुर्माना भी लगाया. कोर्ट ने साफ कहा कि किसी भी नागरिक को बिना किसी कानूनी आधार के एक पल के लिए भी उसकी आजादी से वंचित नहीं किया जा सकता.
यह फैसला जस्टिस सत्यव्रत वर्मा की एकलपीठ ने चार पीड़ितों- लालबाबू राय, सूरज कुमार, शंकर कुमार और रणविजय कुमार- द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया.
क्या था पूरा मामला?
यह मामला वैशाली जिले के गंगाब्रिज थाने से जुड़ा यहां के कुछ पुलिसकर्मियों ने इन चार लोगों को किसी मामले में पूछताछ के लिए उठाया और फिर उन्हें बिना किसी FIR या कानूनी प्रक्रिया के 19 घंटे तक थाने में ही बिठाए रखा. उन्हें न तो उनके परिवार वालों से बात करने दी गई और न ही उन्हें यह बताया गया कि उन्हें क्यों पकड़ा गया है.
कोर्ट ने लगाई पुलिस को कड़ी फटकार
जब यह मामला पटना हाई कोर्ट पहुंचा, तो कोर्ट ने इसे बेहद गंभीरता से लिया. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने यह दलील दी कि इन लोगों को सिर्फ "पूछताछ" के लिए लाया गया था और उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया था. सरकार ने यह भी कहा कि इस घटना के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों का दूसरे जिले में तबादला कर दिया गया
लेकिन कोर्ट सरकार की इन दलीलों से संतुष्ट नहीं हुआ. जस्टिस सत्यव्रत वर्मा ने अपनी टिप्पणी में कहा, "पूछताछ के नाम पर किसी को 19 घंटे तक थाने में कैसे बिठाया जा सकता है? यह सीधे तौर पर व्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है."
कोर्ट ने आगे कहा, "पुलिस कानून से ऊपर नहीं अगर वे कानून का उल्लंघन करेंगे, तो उन्हें भी परिणाम भुगतने होंगे." कोर्ट ने तबादले को 'सजा' मानने से इनकार कर दिया और कहा कि यह एक सामान्य प्रक्रिया है.
पीड़ितों को मिलेगा मुआवजा
अपने ऐतिहासिक फैसले में हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को यह आदेश दिया कि वह चारों पीड़ितों को 50-50 हजार रुपये का मुआवजा दे. इतना ही नहीं, कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार यह मुआवजा राशि उन दोषी पुलिसकर्मियों के वेतन से काटेगी, जिन्होंने इन लोगों को अवैध रूप से हिरासत में रखा था.
पटना हाई कोर्ट का यह फैसला उन अनगिनत लोगों के लिए उम्मीद की एक किरण है, जो कभी न कभी पुलिस की मनमानी का शिकार हुए यह फैसला साफ करता है कि देश में कानून का राज है और किसी को भी, यहां तक कि पुलिस को भी, इसे अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है.