ईरान को मिला नया सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई संभालेंगे कमान, शाह के दौर में पिता पर हुआ हमला देख खौल उठा था खून
News India Live, Digital Desk: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण तनाव के बीच ईरान ने अपने नए सर्वोच्च नेता के नाम का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। दिवंगत आयतुल्लाह अली खामेनेई की जगह अब उनके बेटे मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) ईरान के नए 'सुप्रीम लीडर' होंगे। 56 वर्षीय मोजतबा को एक कट्टरपंथी और रणनीतिकार माना जाता है, जिनकी ताजपोशी ने अमेरिका और इजरायल की चिंताएं बढ़ा दी हैं। उनके जीवन की एक घटना, जहाँ उन्होंने बचपन में 'शाह' के शासनकाल के दौरान अपने पिता पर हुआ जुल्म देखा था, उनके व्यक्तित्व को समझने के लिए काफी अहम मानी जाती है।
मोजतबा खामेनेई: पर्दे के पीछे से सत्ता के शिखर तक
मोजतबा खामेनेई दशकों से ईरान की सत्ता में पर्दे के पीछे से सबसे प्रभावशाली व्यक्ति रहे हैं। 8 मार्च 2026 को ईरान की 'असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स' ने उन्हें सर्वोच्च पद के लिए चुना।
बचपन का वो जख्म: 1979 की क्रांति से पहले जब ईरान में शाह रजा पहलवी का शासन था, तब अली खामेनेई को कई बार जेल जाना पड़ा। मोजतबा ने अपनी आंखों से अपने पिता पर होते अत्याचार और उन पर हुए जानलेवा हमलों को देखा था। जानकारों का मानना है कि इसी संघर्ष ने उन्हें पश्चिम विरोधी और बेहद सख्त बना दिया।
सेना और IRGC का साथ: मोजतबा के पास ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य टुकड़ी 'रिवोल्यूशनरी गार्ड्स' (IRGC) का पूरा समर्थन है। वे खुद ईरान-इराक युद्ध के दौरान मोर्चे पर रहे हैं।
वंशवाद का विवाद: ईरान में 1979 की क्रांति राजशाही (Hereditary Rule) के खिलाफ हुई थी, लेकिन मोजतबा का चुना जाना यह दर्शाता है कि अब वहाँ भी सत्ता पिता से बेटे के हाथ में चली गई है, जिससे देश के भीतर भी बहस छिड़ गई है।
ट्रंप की चुनौती और मोजतबा का कड़ा रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मोजतबा खामेनेई के नाम को 'अस्वीकार्य' बताया था। हालांकि, ईरान ने इस विरोध को दरकिनार करते हुए उन्हें चुनकर यह संदेश दिया है कि वे झुकने वाले नहीं हैं। मोजतबा के नेतृत्व में ईरान की विदेश नीति और भी आक्रामक हो सकती है, विशेषकर परमाणु कार्यक्रम और इजरायल के साथ जारी संघर्ष को लेकर।
क्या बदल जाएगा मिडिल ईस्ट का समीकरण?
मोजतबा को अपने पिता से भी अधिक 'हार्डलाइनर' माना जाता है। उनके पास शासन चलाने का लंबा अनुभव है क्योंकि वे सालों से अपने पिता के 'चीफ ऑफ स्टाफ' के तौर पर काम कर रहे थे। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर हैं कि मोजतबा 'अघोषित युद्ध' को शांति की ओर ले जाते हैं या टकराव और बढ़ेगा।