टी-20 वर्ल्ड कप पर अग्रहण की मार बांग्लादेश की धमकी के बाद आईसीसी की बढ़ीं मुश्किलें
News India Live, Digital Desk : जब भी हम क्रिकेट की बात करते हैं, तो हमारे दिमाग में स्टेडियम का शोर, चौके-छक्कों की बरसात और अपनी टीम की जीत का जज्बा आता है। लेकिन आजकल मैदान के बाहर जो 'गेम' चल रहा है, वह किसी डरावने सपने से कम नहीं है। क्रिकेट की दुनिया में एक बड़ा नाम, बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने टी-20 वर्ल्ड कप से नाम वापस लेने की सुगबुगाहट क्या दी, पूरी दुनिया में क्रिकेट प्रेमियों की धड़कनें तेज हो गई हैं।
क्या है यह पूरा संकट? (आसान शब्दों में)
असली मसला है 'सुरक्षा' और 'सम्मान'। खबरों की मानें तो बांग्लादेश अपनी सुरक्षा चिंताओं को लेकर कड़ा रुख अपनाए हुए है। पर बात सिर्फ सुरक्षा की नहीं है। आईसीसी (ICC) के बड़े टूर्नामेंट्स में हमेशा से भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के बीच की खींचतान एक रोड़ा बनी रही है। लेकिन इस बार जब बांग्लादेश जैसे देश ने अपने पैर पीछे खींचने की बात कही, तो लगा कि मसला अब पहले से कहीं ज्यादा पेचीदा हो गया है।
असुरक्षा का डर या फिर राजनीतिक दबाव?
दुनिया के किसी भी एथलीट के लिए सबसे ज़रूरी है उसका आत्मविश्वास और वह सुरक्षा जो उसे बिना डरे खेलने की आजादी देती है। बांग्लादेश का कहना है कि वे उन हालातों में खेलने को तैयार नहीं हैं जहाँ खिलाड़ियों की जान को कोई खतरा हो। हालाँकि, जानकार इसे बीसीसीआई और आईसीसी पर दबाव बनाने की रणनीति भी देख रहे हैं।
सोचिए, अगर टी-20 वर्ल्ड कप जैसी बड़ी प्रतियोगिता से एक भी मजबूत टीम बाहर होती है, तो उसका रंग फीका पड़ना तय है। आईसीसी इस समय मझधार में फंसा हुआ है—एक तरफ बीसीसीआई की धमक है, दूसरी तरफ पाकिस्तान और बांग्लादेश का अपना पक्ष।
क्रिकेट प्रेमियों की बेबसी
एक फैन होने के नाते, हम इन कागज़ी दांव-पेंचों को कम ही समझ पाते हैं। हम बस ये चाहते हैं कि दुनिया की सबसे बेहतरीन टीमें एक साथ लड़ें। लेकिन जिस तरह की राजनीतिक हवा बह रही है, ऐसा लग रहा है कि अब बल्ले और गेंद से ज्यादा बात बोर्ड रूम की मीटिंग्स और मेल (E-mails) के जरिए हो रही है।
आईसीसी की अब तक की शांति भी कई सवाल खड़े कर रही है। क्या वाकई उनके पास इस संकट का कोई हल है? या फिर इस साल के वर्ल्ड कप को हम किसी 'अधूरे मिशन' की तरह याद रखेंगे?
फिलहाल पूरी नजरें अगले कुछ घंटों और बीसीसीआई की ओर से आने वाले बयान पर टिकी हैं। क्योंकि भारत के रुख के बिना इस मसले का सुलझना नामुमकिन सा लगता है। हम तो यही उम्मीद कर सकते हैं कि राजनीति के खेल पर क्रिकेट की जीत हो और यह टूर्नामेंट उसी चमक के साथ शुरू हो जैसा हमने सोचा था।