सिर्फ कमरा देना काफी नहीं, सुविधाओं का हिसाब दो, पटना में अवैध रूप से चल रहे हॉस्टलों की अब खैर नहीं
News India Live, Digital Desk : एक पिता जब अपनी बेटी को घर से विदा करता है, तो उसे पढ़ाई से ज़्यादा उसकी सुरक्षा की चिंता सताती है। पटना जैसे शहर में आज हज़ारों की संख्या में प्राइवेट गर्ल्स हॉस्टल और पीजी (PG) चल रहे हैं। लेकिन हकीकत यह है कि इनमें से बहुत सारे न तो रजिस्टर्ड हैं और न ही वहां रहने के न्यूनतम मानकों का पालन हो रहा है।
इसी गंभीर मसले को लेकर बिहार राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष अश्वमेध देवी ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने पटना के डीएम को पत्र लिखकर उन सुविधाओं का कच्चा-चिट्ठा माँगा है जो हॉस्टल में लड़कियों को दी जा रही हैं।
क्यों उठी इस कड़े एक्शन की ज़रूरत?
दरअसल, महिला आयोग के पास अक्सर ऐसी शिकायतें पहुँचती हैं कि पटना के बोरिंग रोड, कंकड़बाग या राजेंद्र नगर जैसे इलाकों में हॉस्टल चलाने वाले किराया तो मोटा वसूलते हैं, लेकिन सुविधा के नाम पर कुछ नहीं मिलता। छात्राओं का कहना होता है कि न तो पीने के लिए साफ़ पानी है और न ही समय पर सही खाना मिलता है। सुरक्षा के नाम पर कई जगहों पर सीसीटीवी (CCTV) तक नहीं लगे हैं।
महिला आयोग ने किन चीजों पर मांगा जवाब?
आयोग ने डीएम से विशेष रूप से यह जानने की मांग की है कि:
- क्या इन हॉस्टलों का रजिस्ट्रेशन हुआ है?
- क्या वहां साफ़-सफाई और रहने लायक माहौल है?
- लड़कियों को कैसा खाना परोसा जा रहा है?
- क्या वहां 24/7 सुरक्षा कर्मी और सीसीटीवी कैमरे मौजूद हैं?
हॉस्टल मालिकों की बढ़ेगी अब टेंशन!
आयोग का यह पत्र सिर्फ एक कागज़ी कार्रवाई नहीं है, बल्कि एक बड़ा 'वॉर्निंग साइन' है। अक्सर देखने में आता है कि छोटे-छोटे कमरों में कई-कई छात्राओं को ठूंस दिया जाता है। ऐसे में यदि प्रशासन की टीम इन जगहों का 'रियालिटी चेक' करती है, तो कई अवैध हॉस्टलों पर ताले लटक सकते हैं।
महिला आयोग की इस पहल ने एक बार फिर बहस छेड़ दी है कि 'पढ़ता बिहार' और 'बढ़ता बिहार' की नींव मजबूत करने के लिए हमें सबसे पहले बेटियों के लिए एक सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना होगा।
आपका अनुभव क्या है?
अगर आप या आपके परिवार की कोई सदस्य पटना में किसी हॉस्टल में रहती हैं, तो क्या आपको लगता है कि वहां सब कुछ ठीक है? हमें कमेंट्स में बताएं कि हॉस्टलों में सबसे बड़ी दिक्कत क्या आती है, ताकि यह आवाज़ शासन तक पहुंचे।