राजस्थान विधानसभा में गोकशी पर भारी हंगामा बाबा बालकनाथ का गहलोत सरकार पर वार, गो-हत्यारों को दिया 50 लाख का मुआवजा

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News India Live, Digital Desk: चर्चा के दौरान तिजारा विधायक बाबा बालकनाथ ने दावा किया कि पिछली कांग्रेस सरकार के समय गो-तस्करी और गोकशी के आरोपों में शामिल कुछ संदिग्धों की मौत होने पर सरकार ने उनके परिवारों को 50-50 लाख रुपये का मुआवजा दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि गहलोत सरकार ने "वोट बैंक की खातिर" अपराधियों के प्रति उदारता दिखाई, जबकि गो-पालकों की अनदेखी की गई।

सदन में बहस के मुख्य बिंदु (Key Highlights of Debate)

1. तुष्टीकरण का मुद्दा: बाबा बालकनाथ ने कहा कि गहलोत सरकार के दौरान हिंदू संगठनों और संतों को परेशान किया गया, जबकि गो-तस्करों को संरक्षण मिला। उन्होंने कन्हैयालाल हत्याकांड का जिक्र करते हुए मुआवजा नीति पर सवाल उठाए और मांग की कि गो-हत्या करने वालों के खिलाफ 'हत्या' (Section 302) के तहत मुकदमा दर्ज होना चाहिए।

2. हिंगोनिया गौशाला कांड (Hingonia Gaushala Incident): विपक्ष (कांग्रेस) ने पलटवार करते हुए जयपुर की हिंगोनिया गौशाला में हाल ही में एक गाय का कटा हुआ सिर मिलने का मुद्दा उठाया। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि इस घटना में एक भाजपा कार्यकर्ता का नाम सामने आ रहा है और सरकार उसे बचाने की कोशिश कर रही है।

3. 'राज्य माता' (Rajya Mata) का दर्जा: हवामहल विधायक बालमुकुंद आचार्य ने मांग की कि गाय को राजस्थान में 'राज्य माता' का दर्जा दिया जाए। हालांकि, पशुपालन मंत्री जोराम कुमावत ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है, लेकिन सरकार गो-संरक्षण के लिए कड़े कानून बना रही है।

सदन में टकराव और निलंबन की स्थिति

हंगामा: इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इतनी तीखी नोकझोंक हुई कि सदन को एक ही दिन में 5 से 7 बार स्थगित करना पड़ा।

आमने-सामने विधायक: भाजपा विधायक गोपाल शर्मा और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के बीच बहस इतनी बढ़ गई कि हाथापाई की नौबत आ गई थी।

पोस्टर वार: विपक्षी विधायकों ने सदन के वेल (Well) में आकर कटे हुए सिर वाले पोस्टर लहराकर विरोध जताया, जिस पर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कड़ी आपत्ति जताई।