History of Papad : सिर्फ स्वाद नहीं, हजारों साल पुरानी परंपरा है पापड़ जानें किसने किया इसका आविष्कार और कैसे पहुँचा यह हर घर की थाली तक
News India Live, Digital Desk : भारत में पापड़ का इतिहास उतना ही पुराना है जितना कि हमारी सभ्यता। प्राचीन काल से लेकर आधुनिक 'लिज्जत पापड़' के वैश्विक साम्राज्य तक, पापड़ ने एक लंबा सफर तय किया है। ऐतिहासिक दस्तावेजों और भोजन विशेषज्ञों के अनुसार, पापड़ का उल्लेख सदियों पुराने संस्कृत ग्रंथों में भी मिलता है।
1. पापड़ की उत्पत्ति और प्राचीन नाम (Origin)
पापड़ शब्द संस्कृत के 'पर्पट' (Parpata) से निकला है।
प्राचीन उल्लेख: बौद्ध और जैन साहित्य (करीब 2000 साल पहले) में 'पर्पट' का जिक्र मिलता है, जिसे दाल के आटे से बनाकर सुखाया जाता था।
आयुर्वेद में महत्व: प्राचीन आयुर्वेद ग्रंथों में पापड़ को पाचन के लिए उत्तम बताया गया है, यही कारण है कि इसे भारी भोजन के साथ परोसा जाता है।
2. किसने किया आविष्कार? (The Inventor)
पापड़ के किसी एक 'आविष्कारक' का नाम इतिहास में दर्ज नहीं है, क्योंकि यह एक सामुदायिक खोज थी।
घरेलू परंपरा: इसे प्राचीन भारत की महिलाओं द्वारा अनाज और दालों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने (Preservation) के तरीके के रूप में विकसित किया गया था।
क्षेत्रीय विविधता: दक्षिण भारत में इसे 'अप्पलम', कर्नाटक में 'हप्पला' और उत्तर भारत में 'पापड़' के नाम से पहचान मिली।
3. भारत के विभिन्न हिस्सों में पापड़ के रूप
भारत के हर राज्य में पापड़ बनाने का अपना अनूठा तरीका और सामग्री है:
| क्षेत्र | प्रसिद्ध पापड़ | मुख्य सामग्री |
|---|---|---|
| राजस्थान | मारवाड़ी पापड़ | मूंग दाल और मोठ |
| दक्षिण भारत | अप्पलम | उड़द दाल (बिना मसाले वाला) |
| बिहार/UP | आलू और चावल के पापड़ | उबले आलू और भाप में पके चावल |
| पंजाब | अमृतसरिया पापड़ | काली मिर्च और ढेर सारे मसाले |
| केरल | पापडम | उड़द दाल और नारियल तेल |
4. लिज्जत पापड़: एक क्रांतिकारी मोड़
पापड़ के इतिहास में सबसे बड़ा मील का पत्थर 1959 में आया।
7 महिलाओं की शुरुआत: मुंबई की 7 साधारण महिलाओं ने ₹80 के कर्ज के साथ पापड़ बनाना शुरू किया।
महिला सशक्तिकरण: आज 'लिज्जत' (Mahila Griha Udyog) करोड़ों का टर्नओवर वाला ब्रांड है, जिसने पापड़ को एक घरेलू व्यंजन से बदलकर एक अंतरराष्ट्रीय उद्योग बना दिया। [1.4, 4.2]
5. पापड़ बनाने की पारंपरिक विधि
पापड़ बनाने की कला धैर्य का काम है:
पिसाई: दालों को बारीक पीसकर आटा बनाया जाता है।
कुटाई: आटे में मसाले और पापड़ खार (Sajji Kshar) मिलाकर उसे तब तक कूटा जाता है जब तक वह लचीला न हो जाए।
बेलना: छोटी लोइयों को एकदम पतला बेला जाता है।
धूप में सुखाना: प्राकृतिक तरीके से धूप में सुखाने से ही इसमें असली कुरकुरापन आता है।