Old Pension Scheme: केंद्रीय कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले! रिटायरमेंट के बाद मिलेगी 50% कंफर्म पेंशन? कोर्ट की सख्ती के बाद सरकार का मास्टरप्लान
नई दिल्ली। देशभर के लाखों केंद्रीय और राज्य कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme - OPS) को लेकर एक बेहद बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। पिछले एक दशक से ओपीएस बहाली की सड़कों पर लड़ाई लड़ रहे कर्मचारियों की मुराद अब पूरी होती नजर आ रही है। हाल ही में एक मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद केंद्र सरकार अचानक हरकत में आ गई है। सियासी और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज है कि मार्च 2026 से सरकार कर्मचारियों को उनके अंतिम वेतन (Last Drawn Salary) का 50 फीसदी हिस्सा फिक्स पेंशन के रूप में देने के प्रस्ताव पर मुहर लगा सकती है। अगर कैबिनेट इस पर राजी होती है, तो यह देश के लाखों पेंशनधारकों के लिए किसी बड़े जैकपॉट से कम नहीं होगा। आइए अमर उजाला की इस खास रिपोर्ट में समझते हैं कि सरकार का यह नया मास्टरप्लान क्या है और कर्मचारियों को इससे क्या फायदा होगा।
क्या है पुरानी पेंशन व्यवस्था (OPS) का पूरा गणित?
कर्मचारी लगातार जिस पुरानी पेंशन योजना की मांग कर रहे हैं, वह उनके लिए बुढ़ापे का सबसे सुरक्षित सहारा मानी जाती है। ओपीएस के तहत, जब कोई सरकारी कर्मचारी रिटायर होता है, तो उसे उसकी अंतिम बेसिक सैलरी का करीब 50 फीसदी हिस्सा आजीवन पेंशन के तौर पर दिया जाता है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें महंगाई भत्ता (DA) बढ़ने के साथ पेंशन भी अपने आप बढ़ जाती है। इसके अलावा, कर्मचारी के निधन के बाद परिवार को भी पारिवारिक पेंशन का लाभ मिलता है और सबसे अहम बात, इस योजना के लिए कर्मचारी के वेतन से एक भी रुपये की कटौती (अंशदान) नहीं की जाती है।
न्यू पेंशन स्कीम (NPS) से क्यों खफा हैं कर्मचारी?
साल 2004 में केंद्र सरकार ने पुरानी पेंशन को बंद कर न्यू पेंशन स्कीम (NPS), जिसे अब नेशनल पेंशन सिस्टम कहा जाता है, को लागू कर दिया था। इसे पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) द्वारा संचालित किया जाता है। कर्मचारियों की नाराजगी की मुख्य वजह यही है कि इसमें सरकार के साथ-साथ कर्मचारियों को भी अपनी सैलरी से हिस्सा (अंशदान) देना पड़ता है। इसके अलावा, यह पूरा पैसा शेयर बाजार (Market Linked) में निवेश किया जाता है, जिससे रिटायरमेंट के वक्त मिलने वाली पेंशन फिक्स नहीं होती, बल्कि बाजार के रिटर्न पर निर्भर करती है। इसी अनिश्चितता के चलते कर्मचारी ओपीएस बहाली की मांग पर अड़े हैं।
कोर्ट की फटकार और 'हाइब्रिड मॉडल' का बीच का रास्ता
विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाल ही में कोर्ट ने सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह पेंशन व्यवस्था पर अपना रुख एकदम साफ करे। इस सख्ती के बाद केंद्र सरकार ने डैमेज कंट्रोल करते हुए कैबिनेट की अहम बैठक बुलाने का मन बनाया है। हालांकि, अभी तक कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है, लेकिन सूत्रों का दावा है कि मार्च 2026 में सरकार एक 'हाइब्रिड मॉडल' (Hybrid Model) पेश कर सकती है। इस नए मॉडल के तहत कर्मचारियों को उनकी आखिरी सैलरी का कम से कम 50% हिस्सा फिक्स पेंशन के रूप में देने की गारंटी होगी। साथ ही, इसमें महंगाई भत्ते (DA) का लाभ भी जोड़ा जा सकता है, लेकिन इसके लिए एनपीएस की तरह ही कर्मचारियों का अंशदान जारी रह सकता है। यह ओपीएस और एनपीएस के बीच संतुलन बनाने की एक बड़ी कोशिश मानी जा रही है।
इन राज्यों में पहले से ही बहाल है पुरानी पेंशन
आपको बता दें कि पुरानी पेंशन का मुद्दा देश में एक बड़ा सियासी हथियार भी बन चुका है। केंद्र सरकार के फैसले से पहले ही देश के कई राज्यों ने अपने कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना को दोबारा लागू कर दिया है। इन राज्यों में राजस्थान, छत्तीसगढ़, पंजाब और हिमाचल प्रदेश प्रमुख रूप से शामिल हैं, जहां के सरकारी कर्मचारी मौजूदा वक्त में ओपीएस का पूरा लाभ उठा रहे हैं।
सरकारी खजाने पर बोझ बनाम कर्मचारियों का भविष्य
केंद्र सरकार और वित्त मंत्रालय कई बार यह साफ कर चुके हैं कि पुरानी पेंशन योजना को जस का तस लागू करने से आने वाले सालों में सरकारी खजाने पर कई गुना अधिक वित्तीय बोझ पड़ेगा, जो अर्थव्यवस्था के लिए सही नहीं है। लेकिन लगातार बढ़ते कर्मचारी संगठनों के दबाव और अब कोर्ट की दखलंदाजी के बाद सरकार बीच का रास्ता निकालने पर मजबूर है। अगर 50% सैलरी वाला प्रस्ताव लागू होता है, तो कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद एक निश्चित आय, महंगाई से सुरक्षा, पारिवारिक आर्थिक सुरक्षा और शेयर बाजार के जोखिम से पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी। फिलहाल सभी की निगाहें मार्च 2026 में होने वाली कैबिनेट बैठकों और सरकारी अधिसूचना पर टिकी हुई हैं।