वाराणसी की दालमंडी में लाल निशान का खौफ लंगड़ा हाफिज मस्जिद पर भी लटकी तलवार
News India Live, Digital Desk: धर्म की नगरी काशी के सबसे व्यस्त इलाकों में शुमार दालमंडी में इन दिनों हड़कंप मचा हुआ है। जिला प्रशासन और नगर निगम की टीम ने सड़क चौड़ीकरण के अभियान को गति देते हुए अवैध निर्माणों और नजूल की भूमि पर बने ढांचों पर 'लाल निशान' लगाना शुरू कर दिया है। इस कार्रवाई की सबसे बड़ी गूँज 'लंगड़ा हाफिज मस्जिद' को लेकर सुनाई दे रही है, जिसका कुछ हिस्सा नजूल की जमीन पर होने के कारण लाल निशान की जद में आ गया है।
नजूल की जमीन और प्रशासन का सख्त रुख
वाराणसी विकास प्राधिकरण और राजस्व टीम की पैमाइश में यह बात सामने आई है कि दालमंडी रोड पर कई दुकानों और मकानों का हिस्सा सरकारी (नजूल) भूमि पर कब्जा करके बनाया गया है। प्रशासन का कहना है कि दालमंडी में आए दिन लगने वाले जाम और संकरी गलियों के कारण एम्बुलेंस तक का निकलना दूभर हो जाता है। इसी समस्या के स्थाई समाधान के लिए रोड को चौड़ा करने का मास्टर प्लान तैयार किया गया है। अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि चौड़ीकरण की राह में जो भी अतिक्रमण आएगा, उसे हटाया जाएगा।
लंगड़ा हाफिज मस्जिद: आस्था और नियम के बीच फंसा पेच
दालमंडी की ऐतिहासिक लंगड़ा हाफिज मस्जिद पर लाल निशान लगने के बाद इलाके में तनावपूर्ण शांति देखी जा रही है। मस्जिद कमेटी और स्थानीय लोगों का तर्क है कि यह ढांचा काफी पुराना है, जबकि राजस्व विभाग के नक्शे कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। लाल निशान लगने का मतलब है कि प्रशासन जल्द ही इन हिस्सों को ढहाने की कार्रवाई शुरू कर सकता है। स्थानीय व्यापारियों और मुस्लिम धर्मगुरुओं ने प्रशासन से वार्ता करने और बीच का रास्ता निकालने की अपील की है, ताकि आस्था और विकास दोनों का सम्मान बना रहे।
व्यापारियों में आक्रोश: कारोबार पर संकट के बादल
दालमंडी वाराणसी का एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र है, जहाँ करोड़ों का टर्नओवर होता है। सड़क चौड़ीकरण के लिए दुकानों के सामने के हिस्से तोड़े जाने की खबर से व्यापारी वर्ग काफी चिंतित है। उनका कहना है कि लंबे समय से वे यहाँ कारोबार कर रहे हैं और अचानक इस तरह की कार्रवाई से उनकी रोजी-रोटी पर संकट आ जाएगा। पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर इलाके में गश्त बढ़ा दी है और किसी भी प्रकार के विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए भारी बल तैनात किया गया है। आने वाले कुछ दिन दालमंडी के भविष्य और प्रशासन की सख्ती के लिए बेहद अहम होने वाले हैं।