Hip Stiffness Relief: क्या आपके कूल्हे भी रहते हैं जाम? केवल 5 मिनट के इन योगासनों से पाएं चलने-फिरने में गजब की सहजता

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लखनऊ। आज की 'सिटिंग जॉब' और घंटों कंप्यूटर के सामने बैठने की मजबूरी ने हमारे कूल्हों (Hips) को पत्थर जैसा सख्त बना दिया है। कूल्हों की यह जकड़न न केवल हमारे चलने के तरीके को प्रभावित करती है, बल्कि यह पीठ के निचले हिस्से (Lower Back Pain) और घुटनों के दर्द का भी मुख्य कारण बनती है।

अच्छी बात यह है कि कूल्हों को दोबारा लचीला बनाने के लिए आपको घंटों जिम में पसीना बहाने की जरूरत नहीं है। योग विज्ञान के अनुसार, केवल 5 मिनट का नियमित अभ्यास आपके कूल्हों के 'लॉक' को खोल सकता है। यहाँ कुछ ऐसे चुनिंदा योगासन दिए गए हैं जो कम समय में अधिकतम परिणाम देते हैं।

कूल्हों की जकड़न दूर करने के लिए 5 मिनट का 'क्विक योग'

1. बैठकर कूल्हे घुमाना (Seated Hip Circles)

यह गतिहीनता को दूर करने का सबसे आसान तरीका है। सीधे बैठकर अपने धड़ को धीरे-धीरे गोलाकार दिशा में घुमाएं। यह जोड़ों में 'लुब्रिकेशन' (चिकनाई) पैदा करता है और रक्त संचार बढ़ाता है।

2. लो लंज (Anjaneyasana)

अगर आप दिन भर बैठते हैं, तो यह आसन आपके लिए अनिवार्य है। एक पैर आगे और दूसरा पीछे रखकर घुटने को जमीन पर टिकाएं। यह कूल्हों के अगले हिस्से (Hip Flexors) की मांसपेशियों को गहराई से स्ट्रेच करता है।

3. तितली मुद्रा (Baddha Konasana)

पैरों के तलवों को मिलाकर बैठें और घुटनों को तितली के पंखों की तरह धीरे-धीरे हिलाएं। यह जांघों के भीतरी हिस्से का तनाव दूर करता है और पेल्विक एरिया में लचीलापन लाता है।

4. आनंदा बालासन (Happy Baby Pose)

पीठ के बल लेटकर पैरों को ऊपर उठाएं और हाथों से पकड़कर घुटनों को बगल की ओर खींचें। यह आसन कूल्हों के जोड़ों को बिना किसी दबाव के सुरक्षित रूप से खोलने का मौका देता है।

5. मालासन (Garland Pose/Yogi Squat)

गहरी स्क्वाट स्थिति में बैठने से कूल्हों, टखनों और पीठ के निचले हिस्से को एक साथ आराम मिलता है। यह हमारे शरीर के प्राकृतिक बैठने के तरीके को बहाल करता है और गतिशीलता बढ़ाता है।

6. सुप्त बद्ध कोणासन (Reclining Bound Angle)

अंत में, तितली मुद्रा में रहते हुए धीरे से पीठ के बल लेट जाएं। यहाँ गुरुत्वाकर्षण अपना काम करता है और बिना किसी मेहनत के आपके कूल्हे धीरे-धीरे खुलने लगते हैं।

अभ्यास के लिए कुछ जरूरी सुझाव

सांसों पर ध्यान दें: खिंचाव के दौरान सांस कभी न रोकें। गहरी और लंबी सांस छोड़ने से मांसपेशियां अधिक जल्दी रिलैक्स होती हैं।

निरंतरता: इन आसनों को आप ऑफिस के ब्रेक के दौरान या रात को सोने से पहले भी कर सकते हैं।

जबरदस्ती न करें: योग का अर्थ 'सहजता' है। अपनी शारीरिक सीमा का सम्मान करें और धीरे-धीरे गहराई में जाएं।